गुरुवार, जनवरी 12

गीत समर्पण का गाते हैं


गीत समर्पण का गाते हैं

पुलक भरे जब अपने उर में
साँझ ढले झर जाते हैं,
सँग हवा के इक झोंके पर
झूम झूम इठलाते हैं !

मनहर, कोमल, पुष्प धरा पर
गीत समर्पण का गाते हैं !

लय और गति के सँग बंधे
निज कक्षा में रह सिमटे,
जाने किस अनादि काल से
मंद मंद मुस्काते हैं !

चाँद सितारे ऊपर नभ में
गीत समर्पण का गाते हैं ! 

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...
    समर्पण में कभी कभी बड़ा सुख है...
    सुन्दर गीत.

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  2. चाँद सितारों के समर्पित गीत अच्छे लगे

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  3. बहुत सुन्दर समर्पण गीत लिखा भाव मयी...आभार...

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  4. उत्तर
    1. इमरान, रश्मि जी, विद्या जी, संगीता जी, संगीता जी, सुषमा जी, आप सभी का आभार !

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  5. सुन्दर गीत ..समर्पित हुआ मन..

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