सोमवार, मई 25
बुधवार, मार्च 24
समय
समय
‘समय ठहर गया है’
जब कहता है कोई
तो एक सत्य से उसका परिचय होता है
समय ठहरा ही हुआ है अनंत काल से !
गतिमान वस्तुएं
उसके चलने का भ्रम पैदा कर देती हैं !
‘समय भाग रहा है’
कहता है जब कोई
वह एक अन्य तथ्य को दर्शाता है
भाग रहा है उसका मन
किसी न किसी शै के पीछे !
‘समय उड़ता हुआ सा लगता है’
जब कोई आनंदित होता है
और ठहर जाता है खुद में !
‘काटे नहीं कटता जब समय’
कोई अंधेरे में भटक रहा है
अपनी पीड़ा को टाँक देता है समय पर !
समय कम है उसके लिए जो महत्वाकांक्षी है
समय खराब है उसके लिए जो भाग्यवादी है
समय अच्छा है आशावादी के लिए
हर समय समान नहीं होता यथार्थवादी के लिए !
ज्ञानी जानता है
समय एक कल्पना है
वास्तव में एक बार में एक ही क्षण
मिलता है जीने के लिए !
मंगलवार, दिसंबर 22
जब नया साल आने को है
गुरुवार, नवंबर 5
समय या भ्रम
समय या भ्रम
समय जो निरंतर गतिमान है
क्या वाकई गति करता है?
या घटनाएं ही ऐसा प्रतीत कराती हैं
दिन और रात
माह और वर्ष
जन्म और मृत्यु
के मध्य समय बहता सा लगता है
पर देखने वाला सदा एक सा रहता है !
रेत पर धँसे पाँव ज्यों
कहीं जाते से प्रतीत होते हैं
लहर आकर चली जाती है
वे वहीं के वहीं रहते हैं !
इतिहास बनता रहता है
व्यक्ति वही रहता है
कभी भयभीत, कभी निर्भीक,
कभी शोषक अथवा कभी शोषित
महामारी फिर-फिर दोहराती है
युद्ध भी लड़े जाते हैं बार-बार
जो भी बदलता है वह भ्रम ही सिद्ध होता है
एक पर्दा है जैसे जिस पर
घट रहा है सब कुछ
शायद गहराई में हर मन जानता है
यह एक दोहराया जाने वाला खेल है
और वह इसमें व्यर्थ ही फंस गया
है
सदा से है वह यहीं
वह कहीं गया ही नहीं
सारा भय ऊपर-ऊपर है
विचार में या भावना में
कुछ छूट जाने का भय
कुछ न कर पाने का भय
मारे जाने का भय
जो कंपता है वह प्रतिबिंब है
चाँद को कुछ नहीं होता
मछली के जाल में वह कभी फंसा ही नहीं
बस मान लिया है
सारा समय इस एक क्षण में समाया है
शेष सब.. कुछ छाया और कुछ माया
है !




