बुधवार, जनवरी 23

एक शब्दों का गलीचा


एक शब्दों का गलीचा

गुनगुनाहट, चहचहाहट, मुस्कुराहट चाहिए
हो मगर खालिस न कोई भी बनावट चाहिए !

इक सलीका जिंदगी में इक तरावट चाहिए
हो तमस कितना घना बस एक आहट चाहिए !

लघु सा छिड़काव जल का पांखुरी से करे पावन
एक हाला रौशनी का एक दीवट चाहिए !

बिना माँगे ही बरसती नेमतों की बदलियाँ
बस यहाँ सारे जहां से इक लगावट चाहिए

ज्यों तरंगें उठ रहीं हल्के पवन के स्पर्श से
कृत्य की बस चेतना में छटपटाहट चाहिए

खिल रहे ज्यों कमल सरवर पंक में भी मुस्कुरा  
मन को वैसा ही जुनूं वैसी कसावट चाहिए !

हो विरोधी या समर्थक ऊर्जा ही बांटते
सफर चलता ही रहे न कोई रुकावट चाहिए !

फूल-कांटे संग ही शोभित जहां में हो रहे
पंछियों को गीत सुनने हित बुलाहट चहिये !

शाप या वरदान दोनों मील के पत्थर ही हैं
मंजिलों से पूर्व न कोई थकावट चाहिए !

एक शब्दों का गलीचा चैन से दिल सो सके
प्यार के ताने-बाने में इक बुनावट चाहिए !

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खुबसूरत......सुभानाल्लाह।

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  2. एक शब्दों का गलीचा चैन से दिल सो सके
    प्यार के ताने-बाने में इक बुनावट चाहिए !...... बहुत खूबसूरत शब्दों क गलीचा बुना है आपने अनीता जी !

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  3. बिना माँगे ही बरसती नेमतों की बदलियाँ
    बस यहाँ सारे जहां से इक लगावट चाहिए
    --------------------------------
    अचानक ही आपके ब्लॉग पर आ गया ... बहुत सुन्दर लिखा है आपने . जिन्दगी के आसपास

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  4. एक शब्दों का गलीचा चैन से दिल सो सके
    प्यार के ताने-बाने में इक बुनावट चाहिए !
    ye pyar ke taane -baane me bunavat ho to sara jaha sundar lagta hai

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  5. वाकई खूबसूरत और मनभावन। इमरान भाई ने सही ही कहा है .. 'सुभानाल्लाह'!

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  6. ... मुस्कुराहट चाहिए
    हो मगर खालिस न कोई भी बनावट चाहिए


    हर जगह मिलावट ??
    शुभकामनायें आपको ...

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  7. बहुत सुंदर रचना!:)
    एक-एक पंक्ति अर्थपूर्ण, भावपूर्ण!
    ~सादर!!!

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  8. एक शब्दों का गलीचा चैन से दिल सो सके
    प्यार के ताने-बाने में इक बुनावट चाहिए !

    ...वाह! बहुत सार्थक और प्रवाहमयी अभिव्यक्ति...आभार

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  9. शाप या वरदान दोनों मील के पत्थर ही हैं
    मंजिलों से पूर्व न कोई थकावट चाहिए !
    बहुत सुन्दर गीत .रूपकात्मक परिधान गीत का आकर्षक है मोहक है .

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  10. बेहतरीन रचना। लेखन की सहजता काबिल-ए-तारीफ है।

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  11. हर पंक्ति बहुत सुंदर और सार्थक .... मन को सुकून देने वाली रचना ।

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  12. बिना माँगे ही बरसती नेमतों की बदलियाँ
    बस यहाँ सारे जहां से इक लगावट चाहिए

    क्या बात है ....!!

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    1. हरकीरत जी, स्वागत है आपका इस ब्लॉग पर, आभार !

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  13. इमरान, यशवंत जी, वृजेश जी, वीरू भाई, प्रतिभा जी,कैलाश जी, अनिता जी, मधुरेश जी, राहुल जी, संध्या जी, व शालिनी जी, आप सभी का स्वागत व आभार !

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