शनिवार, नवंबर 1

ऋतू आयी मृदु भावों वाली


ऋतु आयी मृदु भावों वाली


धूप, हवा संग एक हो सकें
नदिया, पिकनिक, फूलों वाली
ऋतु आयी मृदु भावों वाली !

हल्की-हल्की ठंड रेशमी
नहीं ताप अब रवि बरसाता,
बादल लौट गये निज धाम
नीला चंदोवा हर्षाता !

धरा तृप्त है वारिद पीकर
कलियों, तितली, भंवरों वाली
ऋतु आयी मृदु भावों वाली !

 मदिर गंध ले बही समीरा
सुरभि बिखरने को है आतुर,
जीवन अपना राज खोलता
चले भूमि में सोने दादुर !

थिर गम्भीर हुई जलवायु
कण कण को हर्षाने वाली  
ऋतु आयी मृदु भावों वाली !




6 टिप्‍पणियां:

  1. कल 02/नवंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  2. प्रकृति का सुंदर वर्णन ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत हि सुंदर , अनीता जी धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )
    आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 3 . 11 . 2014 दिन सोमवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  4. यशवंत जी, कुमकुम जी, आशीष जी व लेखिका जी, आप सभी का स्वागत व आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  5. जो एहसास खोते से चले गये वक्त की भागदौड़ मे
    उनका एहसास करवाती रचना ।

    उत्तर देंहटाएं