गुरुवार, दिसंबर 29

नया वर्ष भर झोली आया


नया वर्ष भर झोली आया 

मन  निर्भार हुआ जाता है 

अंतहीन है यह विस्तार,
हंसा चला उड़ान भर रहा 
खुला हुआ अनंत का द्वार !

मन श्रृंगार हुआ जाता है 

नया-नया ज्यों फूल खिला हो,
पंख लगे सुरभि गा आयी 
हर तितली को संदेश मिला हो !

मन उपहार हुआ जाता है 

बीत गया जो भी जाने दें,
नया वर्ष भर झोली आया 
  खुलने दें पट नव क्षितिजों के !  

मन मनुहार हुआ जाता है 

रूठ गये जो उन्हें मना लें,
सांझी है यह धरा सभी की 
झाँक नयन संग नगमे गा लें ! 

मन बलिहार हुआ जाता है 

पंछी के सुर, नदिया का जल,
पलकों की कोरें लख छलकें 
हरा-भरा सा भू का आंचल  !




6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 30 दिसम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. स्वागत व बहुत बहुत आभार यशोदा जी..

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  2. नए साल का स्वागत बहुत सुन्दर अंदाज में अच्छा लगा।
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामना

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  3. मालती जी, कविता जी व सुधा जी आप सभी का स्वागत व नये वर्ष के लिए शुभकामनायें..

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