रविवार, दिसंबर 4

अकेलापन और एकांत

अकेलापन



उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक
धरा के इस छोर से उस छोर तक
कोई दस्तक सुनाई नहीं देती

अटूट निस्तब्धता और सन्नाटा
अम्बर के लाखों नक्षत्रों का मौन रुदन
और चन्द्रमा का अकेलापन

क्यों हैं ?.....यह दूरियाँ
यह अलगाव यह अकेलापन
जो चुभता है दंश सा !

एकांत 

उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक 
धरा के इस छोर से उस छोर तक 
एक ही का पसारा है 

अटूट निस्तब्धता और सन्नाटा
अम्बर के लाखों नक्षत्रों का मौन सृजन 
और चन्द्रमा का एकांत 

अद्भुत हैं यह दूरियाँ
यह विस्तार यह एकांत 
जो मिलता है मीत सा !

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 05 दिसम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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