मंगलवार, जनवरी 19

बस इतना सा ही सरमाया

बस इतना सा ही सरमाया

गीत अनकहे, उश्ना उर की 
बस इतना सा ही सरमाया ! 

काँधे पर जीवन हल रखकर 
धरती पर जब कदम बढाये 
कुछ शब्दों के बीज गिराकर  
उपवन गीतों से महकाए ! 

प्रीत अदेखी, याद उसी की 
बस इतना सा ही सरमाया ! 

कदमों से धरती जब नापी
अंतरिक्ष में जा पहुँचा मन 
कुछ तारों के हार पिरोये 
डोल चन्द्रमाओं के सँग-सँग  ! 

कभी स्मृति कभी जगी कल्पना 
बस इतना सा ही सरमाया ! 

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