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शुक्रवार, जनवरी 7

बन के इक-दूजे का संबल



विवाह जीवन को पूर्णता की ओर ले जाने वाला एक पावन बंधन है। इस एक रिश्ते में सारे रिश्ते छिपे हैं। ऊपर-ऊपर से लोग एक को ही देख पाते हैं पर जो भी गहराई में जाते हैं, वे जीवनसाथी में परमेश्वर का रूप भी पाते हैं; जो हर मोड़ पर साथ खड़ा है, जिसके साथ ने सिखाया कि प्रेम हर बात से बड़ा है।मित्र की तरह साथ चलते-खेलते, संगी की  हर पीड़ा को अपना समझते, उम्र के अंतिम पड़ाव तक आते-आते मन से भी आगे आत्मा से जुड़ जाते हैं !

बन के इक-दूजे का संबल


झर-झर ज्यों बहता है निर्झर 

नीरव किसी अरण्य प्रांत में, 

ऐसे ही बहता है अंतर 

प्रेम बना इस शुभ प्रभात में !


दशकों पहले संग चले थे 

आज भी राही से मार्ग पर, 

बन के इक-दूजे का संबल

बढ़ते जाते निर्भय होकर !


मन के पार हुए जब जाना 

युग-युग से है साथ अनूठा, 

नदी-नाव संजोग नहीं था 

जन्मों का अटूट था नाता !


मन को एक दिशा मिलती है 

भावनाएँ भी सुदृढ़ होतीं, 

साहचर्य और मित्रता की 

उर में सुरभित बेलें खिलतीं !


एक-दूसरे के पूरक बन 

जीवन साथी जग में विचरें, 

शिव-शक्ति की कर आराधना 

प्रतिपल श्रेष्ठ बने मन निखरे !




शुक्रवार, जनवरी 25

‘मैं’ से ‘हम’ होने में सुख है



‘मैं’ से ‘हम’ होने में सुख है 


दिल में जोश गीत अधरों पर
लिए हाथ में हाथ डोलते,
इक दूजे के मित्र बने अब
अंतर्मन के राज खोलते !

जीवन एक यात्रा अभिनव
प्रियतम का यदि संग साथ हो,
‘मैं’ से ‘हम’ होने में सुख है 
धूप कड़ी या घन वर्षा हो !

दिवस महीने बरस दशक अब
संग-संग जीते बीते हैं,
नन्ही किलकारियाँ सी थीं जो
हुई युवा अब उड़ने को हैं !

सुंदर घर वर देख भाल कर
उन्हें नये बंधन में बाँधें,
यही स्वप्न अब मन में जगता
मात-पिता का धर्म निबाहें !

इसी तरह हँसते-मुस्काते
जीवन की मंजिल को पालो,
निज कौशल सामर्थ्य बढ़ाकर
इस जग के भी कुछ गम हर लो !

आज छोटी बहन व बहनोई के विवाह की सालगिरह है. 

शुक्रवार, अगस्त 31

उन सभी युवाओं को समर्पित जो विवाह बंधन में बंधने वाले हैं




 यह बंधन तो प्रेम का बंधन है 

बचपन से किशोर फिर युवा होते तन
फिर भी रहे वही बच्चों वाले प्यारे से मन
उन्हीं मासूम मनों के बंधन में बंधे हो तुम दोनों
एक-दूसरे का सम्बल बनकर
देखभाल और परख कर
खूबियाँ और कमियां
सहकर छोटी-बड़ी कमजोरियां
संग-संग चलने का निर्णय है तुम्हारा
बनना चाहते हो हर सुख-दुःख में
इकदूजे का सहारा
निष्ठा और समर्पण
 इन दो स्तम्भों पर टिका है यह बंधन
कुछ अधिकारों और कुछ कर्त्तव्यों का करना है निर्वाह
मैत्री और साझेदारी का नाम है विवाह
सुनहरे भविष्य की नींव है यह प्रथा
मिटाती है दिलों से अधूरेपन की व्यथा
दो नहीं अबसे एक हो तुम
दो ‘मैं’ से मिलकर बना है एक समर्थ ‘हम’
विवाह की पावनता को बरकरार रखना
सदा दूजे को दिया करार रखना
थोड़े में कहें तो अधरों पर मुस्कान
और दिल में ढेर सारा प्यार रखना !


गुरुवार, जनवरी 25

विवाह की वर्षगांठ पर




आज छोटी बहन के विवाह की वर्षगांठ है, यह कविता उन सभी को समर्पित है जिनके विवाह की वर्षगांठ इस हफ्ते है.

विवाह की वर्षगांठ पर शुभकामनाओं सहित 

बरसों से ज्यों चल रहे, लिए हाथ में हाथ
राज खोलते हैं यही, जन्म-जन्म का साथ

इक दूजे का हौसला, इक दूजे का मान
बन सदा दिखलाया है, दिल से अपना जान

जो माँगा पाया सदा, पूर्ण हुई हर आस
आँगन में कलियाँ खिलीं, अंतर में विश्वास

सुर-तालों की साधना, मिल करता परिवार
खुशियाँ बाँटे जगत में, पा सुख का आधार

तन-मन दोनों स्वस्थ हों, और आत्मा पूर्ण
यही दुआ इस सुदिन पर, जीवन हो सम्पूर्ण

शुक्रवार, जनवरी 27

उन सभी के लिए जिनके विवाह की इस वर्ष पचीसवीं सालगिरह है


विवाह की पचीसवीं सालगिरह पर 


स्वयं को केंद्र मानकर
दूसरे को चाहना पहली मंजिल है
जो वर्षों पहले आप दोनों ने पा ली थी

दूसरे को केंद्र मानकर
स्वयं को समर्पित कर देना दूसरी
जिसकी तलाश पूरी होने को है

न स्वयं, न दूसरे को 
अस्तित्त्व को केंद्र मानकर
मुक्त हो जाना अंतिम सोपान है

जिसकी दुआ हम देते हैं
खुद से पार चला जाये जब कोई
तब सिद्ध होता है अभिप्राय
आप के जीवन में
जल्दी ही ऐसा दिन आए ! 

मंगलवार, जुलाई 5

विवाह की वर्षगांठ पर शुभकामनायें



आज एक पुरानी कविता 

तुम्हारे कारण

यह जीवन यदि सुंदर स्वप्न सलोना है, तो सिर्फ तुम्हारे कारण !
इस मन का हर ख्वाब यूँ ही सच होना है, तो सिर्फ तुम्हारे कारण !

बरसों बीते सँग सँग चलते, नया नया सा लगता हर दिन
कैसे कटता सफर अकेले, रहते कैसे हम तुम बिन
भरा हुआ भावों से इस दिल का हर कोना है, तो सिर्फ तुम्हारे कारण !

सहज प्रेम तुमने बरसाया, पूरा का पूरा अपनाया
भुला दिया सारी भूलों को, प्रतिपल नव विश्वास दिलाया  
नहीं कभी यह बंधन अब ढीला होना है, तो सिर्फ तुम्हारे कारण !

नयनों से कह दीं बातें, जब अधर कभी सकुचाए
दिल ने दिल का हाल सुना, जब श्रवण नहीं सुन पाए
इस उर को मुस्काना हर पल कभी नहीं रोना है, तो सिर्फ तुम्हारे कारण !

नहीं कुरेदा कमियों को, बस आदर्शों की ओर बढ़ाया
छूट गयी सारी अकुलाहट, सँग सँग हमने कदम उठाया
दो से एक बनें अब हर बार यही होना है, तो सिर्फ तुम्हारे कारण !

साथ तुम्हारा अनुपम तोहफा, कुदरत ने जो बख्शा
नहीं उऋन हो पायेगें, न होने की अभिलाषा
पाया जो भी शुभ हमने नहीं उसे खोना है, तो सिर्फ तुम्हारे कारण !

दीप दीप से जलता ऐसे, प्रेम से प्रेम उपजता
प्रेम तुम्हारा ही अंतर में, मेरा बन कर सजता
इसी प्रेम को हर क्षण तुम पर अब अर्पित होना है, तो सिर्फ तुम्हारे कारण !

आँखों की चमक, अधरों की हँसी, प्रेम का ही प्रतिबिम्बन
मनः ऊर्जा, कर्म की शक्ति, इसी प्रेम के कारण
हम दोनों के मध्य यही कोई और नहीं होना है, तो सिर्फ तुम्हारे कारण !

गुरुवार, फ़रवरी 28

शुभ विवाह


हाल ही में एक विवाह में सम्मिलित होने का अवसर मिला, कुछ अलग सा अनुभव हुआ,  क्या था वह अनुभव, आप भी पढ़िये और शामिल हो जाइये इस विवाह में...


शुभ विवाह

साथी बचपन के बंधे
आज परिणय सूत्र में,
मुदित माँ करें स्वागत
द्वार पर अति प्रेम से !
एक अनोखे विवाह का
साक्षी बना संसार,
जहाँ दुल्हन ही निभाती
अन्य सभी व्यवहार !
बागडोर सम्भाले निज जीवन की
करती बड़ी कम्पनी में प्रतिष्ठित नौकरी
आत्मविश्वास भरा कदमों में
भरे स्वप्न सुंदर आँखों में... !
श्रम की आभा से दीप्त होती
माँ-पिता को आश्वस्त करती,
नए युग की नई दुल्हन
भारत का नया भविष्य गढ़ती !
न ही कोई झिझक न संकोच.
न डर कहीं नजर आता,
सधे कदमों में उसके
सुंदर भविष्य ही खबर लाता !
अंग्रेजी, हिंदी, असमिया फर्राटे से बोलती
आँखों ही आँखों में दिल के राज खोलती,
दुल्हन यह अनोखी न जरा भी शर्माती  
निज विवाह का निमंत्रण अकेले देने जाती ! 
भाई संग महाराष्ट्रीयन भाभी
आए असम पहली बार,
घूमें, छू लें असम की बयार
नहीं चाहती पड़े उन पर कोई भी भार !
दीदी भी आई गुवाहाटी से, करुणा
जितना हो सके है लुटाती
पिता आजमगढ़ी आनंद और
माँ असम की भारती !
असम और यूपी का अनोखा संगम
शाम को संगीत, सुबह हुआ जोरन
राष्ट्रीयता का प्रतीक यह शुभ विवाह
देख जिसे निकले, बस वाह ! वाह !
ले हाथों में हौराई, जहां सजे बन्दनवार
दुल्हन खड़ी लाल जोड़े में तैयार
आया दूल्हा बन राजकुमार
खुशियों से भर गया सारा परिवार !

गुरुवार, फ़रवरी 21

यह दिन भला-भला लगता है


यह कविता मैंने अपनी उस सखी के लिए लिखी है, जो उम्र के चौथे दशक के आखिरी पड़ाव में कार चलाना सीख रही है, आज उसके विवाह की छब्बीसवीं सालगिरह है.
यह दिन भला-भला लगता है 

नहीं भरोसा रहा तुम्हारा
चुपके-चुपके क्या कर डालो,
कार चलाना सीख रही हो
घर संग, स्टीयरिंग भी सम्भालो !

शॉपिंग करती, पहनो मैचिंग
दूर-दूर तक जाओ घूमने,
पूरी करो हसरतें दिल की
नहीं अधूरे रहें ये सपने !

तुम भी तो मन के मालिक हो
टीवी के ऐसे दीवाने, 
रहे कैमरा हाथों में या
वाह, वाह ! के सुनो फसाने !

सेहत देख आपकी अब तो
किचन में सारे व्यंजन बनते,
जो तुमको रुचता हो अक्सर
सालन भाजी वही तो बनते !

प्रिय पुत्री है गर्व हमारा
दोनों की आदतें हैं जिसमें,
वही साक्षी हम दोनों की
प्रेम हमारा झलके उसमें !

सेवा कर माँ को खुश रखें
यही प्रयास चला करता है,
जीवन के क्रम चलते रहते
यह दिन भला-भला लगता है !

सोमवार, फ़रवरी 11

सभी जोड़ों को समर्पित जिनके विवाह की सालगिरह इस हफ्ते है


कल बड़े भैया-भाभी के विवाह की वर्षगाँठ है, यह कविता उनके साथ उन सभी के लिए है जिनके विवाह की सालगिरह इस हफ्ते है. 

विवाह की वर्षगाँठ पर 

स्वर्ग में तय होते हैं रिश्ते
सुना है ऐसा, सब कहते हैं,
जन्नत सा घर उनका जो
इकदूजे के दिल में रहते हैं !

जीवन कितना सूना होता
तुम बिन सच ही हम कहते, 
खुशियों की इक गाथा उनमें
आंसू जो बरबस बहते हैं !

हाथ थाम कर लीं थीं कसमें
उस दिन जिस पावन बेला में,
सदा निभाया सहज ही तुमने
पेपर पर लिख कर देते हैं !

कदम-कदम पर दिया हौसला
प्रेम का झरना बहता रहता,
ऊपर कभी कुहासा भी हो
अंतर में उपवन खिलते हैं !

नहीं रहे अब ‘दो’ हम दोनों
एक ही सुर इक ही भाषा है,
एक दूजे से पहचान बनी 
संग-संग ही जाने जाते हैं !

आज यहाँ आकर पहुंचे हैं
जीवन का रस पीते-पीते
कल भी साथ निभाएंगे हम
पवन, अगन, सूरज कहते हैं !


शनिवार, जनवरी 7

विवाह की सालगिरह पर


तुम्हारे लिये


तन हैं चाहे दूर आज पर
मन अपने हैं घुले-मिले,
अंतर में इक तार जुड़ी है
तभी तो हम हैं खिले-खिले !

वर्षों पहले तुमने ही तो
लगन लगाई थी भीतर,
जीवन पथ पर सँग चले हम
तय होकर आया था ऊपर !

तुमने ही तो रंग भरे हैं
स्वप्न सजे मेरी आँखों में,
ले पाए लंबी उड़ान हम
जोश भरा मेरी पांखों में !

जो भी दिया प्रेम ही माना
झुंझलाहट भी थी उपहार,
प्रिय का हो, सब कुछ भाता है
गुस्सा हो या खालिस प्यार !

प्रेम खुदाई, प्रेम ही पूजा
यही दुआ, सब अनुभव कर लें,
अर्थ यही है इस बंधन का
इसी भाव को संभव कर लें !

एक नया जीवन जब धारा
नया उजाला घर में छाया,
मिले उसे भी कोई अपना
स्वप्न यही अब दिल में समाया !