विवाह जीवन को पूर्णता की ओर ले जाने वाला एक पावन बंधन है। इस एक रिश्ते में सारे रिश्ते छिपे हैं। ऊपर-ऊपर से लोग एक को ही देख पाते हैं पर जो भी गहराई में जाते हैं, वे जीवनसाथी में परमेश्वर का रूप भी पाते हैं; जो हर मोड़ पर साथ खड़ा है, जिसके साथ ने सिखाया कि प्रेम हर बात से बड़ा है।मित्र की तरह साथ चलते-खेलते, संगी की हर पीड़ा को अपना समझते, उम्र के अंतिम पड़ाव तक आते-आते मन से भी आगे आत्मा से जुड़ जाते हैं !
बन के इक-दूजे का संबल
झर-झर ज्यों बहता है निर्झर
नीरव किसी अरण्य प्रांत में,
ऐसे ही बहता है अंतर
प्रेम बना इस शुभ प्रभात में !
दशकों पहले संग चले थे
आज भी राही से मार्ग पर,
बन के इक-दूजे का संबल
बढ़ते जाते निर्भय होकर !
मन के पार हुए जब जाना
युग-युग से है साथ अनूठा,
नदी-नाव संजोग नहीं था
जन्मों का अटूट था नाता !
मन को एक दिशा मिलती है
भावनाएँ भी सुदृढ़ होतीं,
साहचर्य और मित्रता की
उर में सुरभित बेलें खिलतीं !
एक-दूसरे के पूरक बन
जीवन साथी जग में विचरें,
शिव-शक्ति की कर आराधना
प्रतिपल श्रेष्ठ बने मन निखरे !






