मंगलवार, मार्च 8

विश्व महिला दिवस पर शुभकामनायें !

इस जहाँ में नारियां   

प्रेम सुरभि से धरा के, सकल कण-कण को भिगोतीं
ज्यों हों केसर क्यारियाँ, इस जहाँ में नारियाँ !

कोख में धरती सरिस, स्वप्न संतति का संजोतीं
रोपतीं फुलवारियां, इस जहाँ में नारियाँ !

बालमन को पंख देतीं, स्नेह का साया युवा को
प्रीत की पिचकारियाँ, इस जहाँ में नारियाँ !
छोड़ कर झूठा अहं, संस्कृति को दिशा देतीं
झेलतीं दुश्वारियाँ, इस जहाँ में नारियाँ !

अनिता निहालानी
८ मार्च २०११   





9 टिप्‍पणियां:

  1. 'नारी बिना अनारी नर '

    महिला दिवस पर नारी शक्ति को नमन .......एक भी दिवस शुभ नहीं हो सकता नारी के बिना

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन पोस्ट.
    महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनायें'

    उत्तर देंहटाएं
  3. कोख में धरती सरिस, स्वप्न संतति का संजोतीं
    रोपतीं फुलवारियां, इस जहाँ में नारियाँ !
    bahut hi sarthak tulna aur prabhawi sampreshan. Badhaai

    उत्तर देंहटाएं
  4. "कोख में धरती सरिस, स्वप्न संतति का
    संजोतीं रोपतीं फुलवारियां, इस जहाँ में नारियाँ!"

    नारी को परिभाषित करती महिला दिवस पर सुंदर प्रस्तुति. बधाई अनीता जी.

    उत्तर देंहटाएं
  5. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नारी सम्मान को समर्पित गीत न केवल सार्थक है बल्कि सरस भी है।

    शुभकामनाएं,

    उत्तर देंहटाएं
  6. झेलतीं दुश्वारियाँ, इस जहाँ में नारियाँ....

    सच है ...शुभकामनायें ..

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छी रचना ! हार्दिक शुभकामनाएँ !

    उत्तर देंहटाएं