शुक्रवार, जून 3

तुमने उसका घर देखा है


तुमने उसका घर देखा है

है विस्तीर्ण, अनंत, असीम
कोई द्वार नजर न आता,
स्वर्णिम सी ज्योति बिखरी है
मद्धिम स्वर में कोई गाता !

नहीं क्षितिज की भी रेखा है
तुमने उसका घर देखा है !

मौन गूंजता प्रेम विहंसता
शांति पुष्प आनंद लुटाते,
सुख छौना अबाध विहरता
पावन अमृत के नद बहते !

उसी प्रिय का सब लेखा है
तुमने उसका घर देखा है !

खो जाते सब भाव इतर तब
ऊपर उठ जाता मन जग से
झलक यदि मिल जाये पल भर,
जल जाते संशय सब उर के !

दुःख केवल एक भुलेखा है
तुमने उसका घर देखा है !

अनिता निहालानी
३ जून २०११



10 टिप्‍पणियां:

  1. खो जाते सब भाव इतर तब
    ऊपर उठ जाता मन जग से
    झलक यदि मिल जाये पल भर,
    जल जाते संशय सब उर के !

    बहुत सच कहा है...सुन्दर सार्थक प्रस्तुति..

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  2. खो जाते सब भाव इतर तब
    ऊपर उठ जाता मन जग से
    झलक यदि मिल जाये पल भर,
    जल जाते संशय सब उर के !

    दुःख केवल एक भुलेखा है
    तुमने उसका घर देखा है

    आपका लिखा पढ़ कर शांति महसूस होती है ..सुन्दर प्रस्तुति

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  3. bahut sundar bhavabhivyakti .hamne to bas aap ka blog dekha hai .aabhar

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  4. मौन गूंजता प्रेम विहंसता
    शांति पुष्प आनंद लुटाते,
    सुख छौना अबाध विहरता
    पावन अमृत के नद बहते !

    उसी प्रिय का सब लेखा है
    तुमने उसका घर देखा है !

    सुंदर अभिव्यक्ति

    आभार

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  5. खो जाते सब भाव इतर तब
    ऊपर उठ जाता मन जग से
    झलक यदि मिल जाये पल भर,
    जल जाते संशय सब उर के
    sundar bhavabhivyakti.

    उत्तर देंहटाएं
  6. दुःख केवल एक भुलेखा है
    तुमने उसका घर देखा है !
    PRASHANSANIYA ...!!
    ATI SUNDER ...-ANITA JI ...!!

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  7. • प्रायः इकरंगी होती जा रही काव्य-भाषा के बीच आपकी भाषा नया अर्थ और अर्थ सौंदर्य लेकर आई है।

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  8. भुलेखा ..लेखा..सुन्दर शब्द..सुन्दर भाव .

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  9. खो जाते सब भाव इतर तब
    ऊपर उठ जाता मन जग से
    झलक यदि मिल जाये पल भर,
    जल जाते संशय सब उर के !

    बस एक ही झलक....जिंदगी बदल देती है.....बहुत खूब....शानदार |

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