मंगलवार, जून 21

विश्व संगीत दिवस पर शुभकामनाएँ


संगीत

प्राणों में नव रस भर, मिठास संगीत भरे
स्वर लहरी गुंजित हो, प्रमुदित उर सबके करे !

रसवंती धार बहे, श्रवणों को सार मिले
सुर में जब गीत उगें, मन को बहार मिले

जीवन को सिंचित कर, रग-रग में अमिय भरे
स्वर लहरी गुंजित हो, विकसित उर कलिका करे !

चेतन कर सुप्त हृदय, नव भाव जगा देता  
व्याकुल मन सहला कर, नव आस जगा देता !

युग-युग से राग व सुर, मानस में ललक भरे
स्वर लहरी गुंजित हो, पुलकित अंतर कर दे !

अनिता निहालानी
२१ जून २०११  

8 टिप्‍पणियां:

  1. चेतन कर सुप्त हृदय, नव भाव जगा देता
    व्याकुल मन सहला कर, नव आस जगा देता

    संगीत की यही तो सबसे बड़ी खासियत है.

    -----------------------------------------
    कल 22/06/2011को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की गयी है-
    आपके विचारों का स्वागत है .
    धन्यवाद
    नयी-पुरानी हलचल

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  2. जीवन को सिंचित कर, रग-रग में अमिय भरे
    स्वर लहरी गुंजित हो, विकसित उर कलिका करे
    bahut sundar abhivyakti hai anita ji.kya kahun ye hi tippani ka style hai varna mere pas shabd nahi hain aisee sundar prastuti ke liye.aapki hindi bahut smriddh hai.

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  3. युग-युग से राग व सुर, मानस में ललक भरे
    स्वर लहरी गुंजित हो, पुलकित अंतर कर दे !
    bahut sunder bhaav ...!!

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  4. युग-युग से राग व सुर, मानस में ललक भरे
    स्वर लहरी गुंजित हो, पुलकित अंतर कर दे !

    सुंदर रचना....

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  5. व्याकुल मन सहला कर, नव आस जगा देता
    sangeet ke mahatv ko bahut sundarta ke sath ukera hai aapne .badhai .

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  6. युग-युग से राग व सुर, मानस में ललक भरे
    स्वर लहरी गुंजित हो, पुलकित अंतर कर दे !
    bahut sunder bhav liye behatrin rachanaa.badhaai sweekaren.




    please visit my blog.thanks.

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  7. जब कोई सच्चा दिल से गाता है.....तो इश्वर की वाणी सा प्रतीत होता है......बहुत सुन्दर पोस्ट|

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