गुरुवार, जून 23

मेरे सपनों का भारत


मेरे सपनों का भारत

जो देश गुलाम बना था तब
अब जाग गया है, हुंकारे,
कोई लूट नहीं पायेगा
जन-जन देखो यही पुकारे !

जो गुजर गया फिर ना होगा
अब नई इबारत लिखनी है,
इस भारत की तस्वीर नयी
जग के नक्शे में भरनी है !

आदर्शों की ध्वजा, पताका
अब पुनः यहाँ लहराएगी,
सत्य, अहिंसा और प्रेम के
जनता गीत नए गायेगी !

भूखा ना कोई सोयेगा
हो निर्भय नारी निकलेगी,
शोषण, पीड़न अब न होगा
हर बच्ची कलिका सी खिलेगी !

भयमुक्त हो जन विचरेंगे
अपनेपन की प्रबल कामना,
डंडे का कोई काम न होगा
जब फैलेगी सद् भावना !

थाने भी निरापद होंगे
संसद में न धींगामुश्ती,
बाहुबली बस रंगमंच पर
केवल मैदानों में कुश्ती !

वेदों की ऋचाएँ फिर से
अधरों पर शोभित होंगी,
अपनी भाषा, अपनी बोली
जग में गौरवान्वित होगी !

ऐसा होगा देश हमारा
स्वप्न सभी भारतीयों का,
पूर्ण करेंगे मिलजुल कर हम
नव जोश जगा है हम सब का !

अनिता निहालानी
२३ जून २०११  



7 टिप्‍पणियां:

  1. जोश से भरा देश प्रेम राष्ट्र प्रेम से भरी सुन्दर रचना

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  2. वेदों की ऋचाएँ फिर से
    अधरों पर शोभित होंगी,
    अपनी भाषा, अपनी बोली
    जग में गौरवान्वित होगी !

    बहुत सुन्दर भाव

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  3. ऐसा होगा देश हमारा
    स्वप्न सभी भारतीयों का,
    पूर्ण करेंगे मिलजुल कर हम
    नव जोश जगा है हम सब का
    aisa zaroor hoga jab aap jaisa vishwas ham sabme hoga.

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  4. होगा ज़रूर ऐसा ही होगा......और हमारे करने से ही होगा......बहुत सुन्दर......लाजवाब पोस्ट|

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