रविवार, फ़रवरी 16

इंतजार इक नयनों में पलने देना

इंतजार इक नयनों में पलने देना


कुछ करना कुछ ना करने की जिद करना
अच्छा है खुद से सब कुछ होने देना

करने में सीमा होगी श्रम भी होगा
अच्छा है बस उसको ही करने देना

जैसे कलियाँ फूल बनी इतराती हैं
किस्मत वाले बन सब कुछ घटने देना

क्या करना जब खबर नहीं कोई इसकी
इक मुस्कान न अधरों से हटने देना

खाली होकर कभी-कभी तो बैठ रहो
मिलजुल रहना रार नहीं तनने देना

हर दिन कुदरत एक चुनौती लाएगी  
दोनों बाहें फैला कर स्वागत करना

कितनी देर लगेगी उससे मिलने में
हौले से बस पलकों को खुलने देना

शुभ करने का दिल चाहे कर ही लेना
पछतावे से दिल का न आँगन भरना

खुला रहे हर पल ही दरवाजा मन का
भेद छिपा कर नहीं कभी उससे रखना

जीवन भर भी मिलने में है लग सकता
एक प्रतीक्षा अंतर में झरने देना






7 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन भर भी मिलने में है लग सकता
    एक प्रतीक्षा अंतर में झरने देना ...
    बहुत ही सुन्दर ... बहुत ही भावपूर्ण ...

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  2. सुन्दर रचना-
    आभार आदरणीया-

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  3. जीवन भर भी मिलने में है लग सकता
    एक प्रतीक्षा अंतर में झरने देना
    ...बहुत सुन्दर और सटीक...हरेक पंक्ति गहन जीवन दर्शन दर्शाती...

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  4. कैलाश जी स्वागत व आभार !

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  5. बहुत ही सुन्दर.... समर्पण का भाव कितनी शांति देता है .... वाह

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