बुधवार, फ़रवरी 5

लो आ गया वसंत

लो आ गया वसंत


धूप रानी हो गयी
रुत सुहानी हो गयी
बाग में कलियाँ खिलाता
छा गया वसंत
लो आ गया वसंत !

खुशबुएँ तन पर लपेटे
रंग अनगिन भी समेटे
भू सजाता मुस्कुराता
भा गया वसंत
लो आ गया वसंत !

भ्रमर गूँजते विकल
तितलियों के उड़ें दल
कुम्हलाया मुरझाया मन
खा गया वसंत
लो आ गया वसंत !

मंजरी मदहोश हुई
मस्तियों की कोष हुई
आम्र वन में खिलखिलाता
सा गया वसंत
लो आ गया वसंत !
  


8 टिप्‍पणियां:

  1. बसंत के बहुत सुंदर रंग कविता में .... बसंत पंचमी की बहुत बहुत बधाई और शुभकामना !!

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  2. लो आ ही गया बसंत .... बहुत खूबसूरत रचना . बसंत का स्वागत है .

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  3. बसंत पर बहुत सुंदर उद्गार ...!!

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  4. धूप रानी हो गयी
    रुत सुहानी हो गयी
    बाग में कलियाँ खिलाता
    छा गया वसंत
    लो आ गया वसंत !

    खुशबुएँ तन पर लपेटे
    रंग अनगिन भी समेटे
    भू सजाता मुस्कुराता
    भा गया वसंत
    लो आ गया वसंत !

    मनमोहिनी सांगीतिक रचना।

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  5. सच में आ गया प्यारा वसंत
    कविता भी वासंती खुशबू लिए हुए
    सादर !

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  6. रंजना जी, अनुपमा जी, शिवनाथ जी, प्रतिभा जी, वीरू भाई, इमरान व संगीता जी आप सभी का स्वागत व आभार !

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