मंगलवार, फ़रवरी 18

दिल में उसके हम रहते हैं

दिल में उसके हम रहते हैं



वह रहता है अपने दिल में
सुना था जाने कितनी बार,
झाँका जब भी भीतर अपने
पाया केवल यह संसार !

चाह भरी थीं सुख की अनगिन
नाम छोड़ कर जाने की धुन,
खुद के बल पर मिला न जो भी
रब से उसको पाने की धुन !

लेकिन हर ख्वाहिश के पीछे
मांग ख़ुशी की छिपी हुई थी,
कुछ कर के दिखलाने में भी
भीतर एक पुलक जगती थी !

हुई जो पूरी चाह कभी तो
नयी लालसा को जन्मा कर,
एक छलावा, सम्मोहन सा
घिरा रहा अंतर उपवन पर !

तभी किसी ने कहा कान में
शरण में आ जाओ तुम मेरी,
नयन मूंद कर अब जब झाँका
तृप्ति की थी राह सुनहरी !

मन में कौंध गया तब राज
दिल में उसके हम रहते हैं,
जहाँ अभाव कभी न कोई
सुमिरन के दरिया बहते हैं !




5 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर संकेत किया है उस परमात्मा की और जो हमारे हृदय में रहता है हम हैं कि उसकी और पीठ किये हैं।

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  2. लेकिन हर ख्वाहिश के पीछे
    मांग ख़ुशी की छिपी हुई थी,......बहुत ही बढ़िया

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