बुधवार, मार्च 30

जीवन मधुरिम काव्य परम का

जीवन मधुरिम काव्य परम का

फिरे सहज श्वासों की माला

हम भाव सुगंध बनें,

जीवन मधुरिम काव्य परम का

इक सरस प्रबंध बनें !

 

जगती के इस महायज्ञ में

आहुतियाँ अपनी हों,

निशदिन बंटता परम उजास

मेधा शक्ति ज्योति हो !

 

शब्द गूँजते कण-कण में नित

बाँचें ज्ञान ऋचाएं,

चेतन हो हर मन सुन जिसको

गीत वही गुंजायें !

 

शुभता का ही वरण सदा हो

सतत जागरण ऐसा,

अधरों पर मुस्कान खिला दें

हटें आवरण मिथ्या !

 

उसकी क्षमता है अपार फिर

क्यों संदेह जगाएं,

त्याग अहंता उन हाथों की

कठपुतली बन जाएँ !


11 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 31- 3-22 को चर्चा मंच पर चर्चा - 4386 दिया जाएगा| चर्चा मंच पर आपकी उपस्थिति चर्चाकारों का हौसला बुलंद करेगी
    धन्यवाद
    दिलबाग

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 31 मार्च 2022 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  3. सुंदर सराहनीय प्रेरक रचना ।

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  4. ओंकार जी व मनोज जी, स्वागत व आभार !

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