मंगलवार, अगस्त 30

गणेश चतुर्थी

 तेरे गुण अनुपम अनंत हैं

जग करता तेरा आराधन

हे गणपति ! हम तुझे चाहते,

 सबके साधन पूर्ण करे तू 

तुझसे बस हम प्रेम मांगते !


ज्ञानसिंधु तू विघ्न विनाशक

रिद्धि सिद्धि का भी है दाता,

 अव्यक्त, चिन्मया, अविनाशी

बुद्धि, विवेक, बोध प्रदाता !


तू विशाल, निर्भय, गर्वीला

दर्शन तेरा शक्ति जगाता,

तेरे गुण अनुपम अनंत हैं

अंतर में चेतना जगाता  !


बड़ी शान है, बड़ा दबदबा

हर बाधा को सदा रौंदता,

आगे बढ़ने का बल देता

अति दयालु, हर पीड़ा हरता !


कर्ण विशाल सभी की सुनता

नयनों में असीम गहराई,

जो भी झाँकें इन नयनों में

प्रज्ञा उसकी भी जग आई !


छोटे-बड़े सभी हैं तेरे

सदा जागृत सजग प्रहरी सा,

भक्त प्रेम से बंधता तुझसे

दुर्जन को यह पाश बाँधता !


छोटा सा मूषक भी तेरा

मोदक मृदु आनंद सा  रसमय,

तुझे समर्पित है तन-मन-धन

हे अनंत ! जग तुझको ध्याता !


8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत सुंदर और आनंदप्रदायक स्तुति। गणपति महोत्सव की बधाई!!!

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 1.9.22 को चर्चा मंच पर चर्चा - 4539 में दिया जाएगा| आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी
    धन्यवाद
    दिलबाग

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  3. स्वागत व आभार ओंकार जी !

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