गुरुवार, मई 5

दिल में रहे किसी के


दिल में रहे किसी के

हर दिल में कैद है इक दरिया मुहब्बतों का
बांधे न बांध जिसको सागर की हो तमन्ना !

कदमों में कैद राहें मंजिल का पता पूछें
थक कर नहीं थमे गर साहिल की हो तमन्ना !

हर दिल बना है भिक्षु हर दिल तलाशता है
सब कुछ लुटा दे जिसको उल्फत की हो तमन्ना !

हाथों को यूँ उठाये तकता है आसमां को
खुद पर यकीन कर जो जन्नत की हो तमन्ना !

तकदीर के भरोसे तदबीर से है गाफिल
दिल में रहे किसी के गर रब की हो तमन्ना !

अनिता निहालानी
५ मई २०११


8 टिप्‍पणियां:

  1. हाथों को यूँ उठाये तकता है आसमां को
    खुद पर यकीन कर जो जन्नत की हो तमन्ना !

    बहुत प्रेरक सुन्दर रचना..आभार

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  2. बहुत भावपूर्ण उत्कृष्ट रचना..

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  3. तकदीर के भरोसे तदबीर से है गाफिल
    दिल में रहे किसी के गर रब की हो तमन्ना
    bahut sundar bhavon ko abhivyakti pradan ki hai aapne .badhai .

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  4. हाथों को यूँ उठाये तकता है आसमां को
    खुद पर यकीन कर जो जन्नत की हो तमन्ना !
    bahut achchi gazal , har sher me ek seekh hai jivan ki !

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  5. बहुत ही खूब.
    हर शेर जीवन दर्शन से ओत प्रोत.
    आपकी कलम को सलाम.

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  6. अनीता जी,

    बहुत खूबसूरत .........अब आप उर्दू में भी बहुत अच्छा लिख रही हैं.....शानदार लगी ग़ज़ल.....आखिरी के दो शेर बहुत पसंद आये.......

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