शनिवार, मई 7

बस इतना सा ही सरमाया


बस इतना सा ही सरमाया


गीत अनकहे, उश्ना उर की
बस इतना सा ही सरमाया !

कांधे पर जीवन हल रखकर
धरती पर फिर कदम बढाये
कुछ शब्दों के बीज गिराए
उपवन गीतों से महकाए !

प्रीत अदेखी, याद उसी की
बस इतना सा ही सरमाया !

कदमों से धरती जब नापी
अंतरिक्ष में जा पहुँचा मन
कुछ तारों के हार पिरोये
डोले चन्द्रमाओं सँग-सँग !

कभी स्मृति, कभी कल्पना
बस इतना सा ही सरमाया !


अनिता निहालानी
७ मई २०११

7 टिप्‍पणियां:

  1. कदमों से धरती जब नापी
    अंतरिक्ष में जा पहुँचा मन
    कुछ तारों के हार पिरोये
    डोले चन्द्रमाओं के सँग-सँग
    bahut sundar bhavabhivyakti.badhai.

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  2. बहुत ही सुन्दर भाव........

    उश्ना - ???
    अदेखी - अनदेखी?

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  3. कभी स्मृति, कभी कल्पना
    बस इतना सा ही सरमाया !

    बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना...

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  4. कुछ शब्दों के बीज गिराए
    उपवन गीतों से महकाए !
    यह पंक्तिया आप मुझे दे दें, आपका आभारी रहूँगा ...

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  5. गीत अनकहे, उश्ना उर की
    बस इतना सा ही सरमाया !

    बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना.

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  6. इमरान जी, देर से जवाब देने के लिये क्षमा, अदेखी व अनदेखी दोनों का एक ही अर्थ है तथा उश्ना यहाँ पर यानि असम में तप्त को कहते हैं, मुझे तृष्णा और ऊष्मा दोनों के भाव लिये लगा यह शब्द.

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  7. बेहद प्रभावशाली..बहुत ही कोमल अभिव्यक्ति..

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