मंगलवार, जुलाई 16

अग्नि एक संकल्प की जगे

अग्नि एक संकल्प की जगे




जाना है दूर अति सुदूर
पावों में पड़ी हैं बेड़ियाँ ,
कांटे बिखरे कदम-कदम पर
पुकारतीं किन्तु रण भेरियां !

एक युद्ध लड़ा जाना है
यात्रा इक आमन्त्रण देती,
आरोहण उच्च आकांक्षा का
ज्योति एक निमन्त्रण देती !

एक लक्ष्य साधना है पावन
‘कुछ’ तो अनावृत करना है,
नन्हे-नन्हे स्फुलिंगों से  
मन का अंधकार भरना है !

चमकीले रंगो वाले कुछ
जगत अनोखे कहीं छिपे हैं,
आओ उनको ढूँढ़ निकालें
छाया जिनकी यहीं कहीं है !

 दस्यु छिपे हैं अंधकार में
छिप कर वार किया करते,
निर्मल मन के शीतल जल में
विष की धार भरा करते !

अग्नि एक संकल्प की जगे
ज्योति प्रखर रोशन सब कर दे
एक ऊष्मा अमर प्रेम की
प्रज्ज्वलित कण-कण नभ तक कर दे


9 टिप्‍पणियां:

  1. इस युद्ध का शंखनाद भीतर तक गूंजता है.......बहुत ही सुन्दर।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति !

    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post सुख -दुःख

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  3. दस्यु छिपे हैं अंधकार में
    छिप कर वार किया करते,
    निर्मल मन के शीतल जल में
    विष की धार भरा करते !



    यही दस्यु सर्व व्यापी माया के एजेंट हैं .लोग ईश्वर को सर्वयापी समझते हैं वह तो शान्ति धाम (परम धाम ,परलोक ,ब्रह्म लोक का रहने वाला है ,मुझ आत्मा का मूल वतन भी वाही घर है )श्री में आने से मैं जीवनबंध में आ गईं हूँ .

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  4. आपकी आशाएं पूर्ण हों ..
    मंगलकामनाएं !

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  5. चमकीले रंगो वाले कुछ
    जगत अनोखे कहीं छिपे हैं,

    वाह!

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  6. अग्नि एक संकल्प की जगे
    ज्योति प्रखर रोशन सब कर दे
    एक ऊष्मा अमर प्रेम की
    प्रज्ज्वलित कण-कण नभ तक कर दे ..

    आमीन ... इस ओज़स्वी रचना को नमन है मेरा ... ह्रदय में मुक्त भाव जगाता काव्य ...

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