मंगलवार, जून 12

जीवन में भर दिया सवेरा



जीवन में भर दिया सवेरा

जब-जब तुझे पुकारा दिल ने
छुपा हुआ था वहीं कहीं तू,
उस पुकार में ही दब जाती
होगी, तेरी मंद गुफ्तगू !

जब-जब सुख के पीछे दौड़े
सुखस्वरूप तू वही कहीं था,
उसी दौड़ से दूर निकल गए
क्या तू तब धीरे से हँसा था !

जब-जब अहंकार जगाया
तूने ही तो चूर किया था,
तुझसे दूर चले हम जाएँ
यह तुझको मंजूर नहीं था !

जब-जब भय का दानव जागा
सम्बल से तू ने ही भरा था,
हद से बढ़ी कामना जब-जब
दुःख देकर अज्ञान हरा था !

पल-पल भीतर जाग रहा था
जब-जब अलस प्रमाद ने घेरा
 खींच-खींच कर रहा जगाता
जीवन में भर दिया सवेरा !


10 टिप्‍पणियां:

  1. पल-पल भीतर जाग रहा था
    जब-जब अलस प्रमाद ने घेरा
    खींच-खींच कर रहा जगाता
    जीवन में भर दिया सवेरा !.....बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  2. सुन्दर........
    अति सुन्दर............

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  3. खींच-खींच कर रहा जगाता
    जीवन में भर दिया सवेरा !
    bahut sundar ...

    atmavishwas se bhari ...amoolya kriti ...!!

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  4. पल-पल भीतर जाग रहा था
    जब-जब अलस प्रमाद ने घेरा
    खींच-खींच कर रहा जगाता
    जीवन में भर दिया सवेरा !

    ....बिलकुल सच....वह तो हमारे आसपास ही होता है, हम ही समझ नहीं पाते...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  5. जीवन में भर दिया सवेरा ..छू न पाए कभी अँधेरा
    बहुत ही सुन्दर...

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  6. बहुत बेहतरीन रचना...बधाई स्वीकारें।

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  7. जब-जब अहंकार जगाया
    तूने ही तो चूर किया था,
    तुझसे दूर चले हम जाएँ
    यह तुझको मंजूर नहीं था !

    वाह..वाह...वाह...बेजोड़ रचना

    नीरज

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  8. जब-जब अहंकार जगाया
    तूने ही तो चूर किया था,
    तुझसे दूर चले हम जाएँ
    यह तुझको मंजूर नहीं था !

    प्रभु अपने भक्तों को सही मार्ग पर चलाता है ... सुंदर रचना

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  9. जब-जब अहंकार जगाया
    तूने ही तो चूर किया था,
    तुझसे दूर चले हम जाएँ
    यह तुझको मंजूर नहीं था !

    सुन्दर और शानदार ये पंक्तियाँ बहुत पसंद आयीं।

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