रविवार, जून 24

याद तेरी


याद तेरी

तू प्यार समोए है अनंत
छू जाता पवन झंकोरे में,
कभी लहराती शाखाओं में
कभी झूम रहे इन पत्तों में !

बन सुंदर कीट चमकता है
जुगनू की आभा में छिपता,
कभी कलरव कूकू कोकिल की
कभी हरी दूब में तू हँसता !

सरगोशी सांय सांय की जो
जब पवन सुनाया करती है,
पीपल के पल्लव नाच रहे
बदली छा जाया करती है !

जब सूर्य चमकता है नभ में
मेघों के पार रजत बन के,
जब किरणें तन को छू जातीं
वृक्षों के पत्तों से छन के !

जब कोमल पुष्प की पंखुडियां
झर झर झर जाती हैं यूँही,
तब दिल में तेरी परछाई
इक मौन सी भर जाती यूँही !  

12 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय अनीता जी
    नमस्कार !
    जब कोमल पुष्प की पंखुडियां
    झर झर झर जाती हैं यूँही,
    तब दिल में तेरी परछाई
    इक मौन सी भर जाती यूँही !
    ....बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

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  2. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है...:-)
    नई पोस्ट .....मैं लिखता हूँ पर आपका स्वगत है

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  3. आपकी हर रचना बहुत खूबसूरत होती है ...सुकून सा देने वाली

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  4. जब कोमल पुष्प की पंखुडियां
    झर झर झर जाती हैं यूँही,
    तब दिल में तेरी परछाई
    इक मौन सी भर जाती यूँही !

    ....बहुत उत्कृष्ट भावाभिव्यक्ति....आभार

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  5. सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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  6. एक आनंद भरती रहें यूँ ही अपनी सुन्दर रचनाओं से...

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    1. और इसी तरह आप पढ़ती रहें....

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