शुक्रवार, सितंबर 16

शुभ दीपक एक जलाना है

शुभ दीपक एक जलाना है


छँट जाएगा घोर अँधेरा 

उहापोह, उलझन का डेरा, 

थोड़ा सा स्नेह जगाना है 

शुभ दीपक एक जलाना है !


एक से फिर अनेक जल सकते

ज्योति की आकर बन सकते,

अनथक पथ चलते जाना है 

मग दीपक एक जलाना है !


फूल खिलाये हैं जिसने नित 

नीरवता गूँजे जिसके मित,

उसका इक गीत सुनाना है 

यश दीपक एक जलाना है !


करुणा, प्रेम, तपस, प्रार्थना 

दिलों में सोयी मधुर भावना, 

हौले से  पुनः जगाना है 

जय दीपक एक जलाना है !


दीप जल रहे जो नयनों में 

सुहास झरे मृदुल बयनों में, 

ऐसा इक राग सुनाना है 

हित दीपक एक जलाना है !


वचन कभी जो शर से चुभते 

निज अंतर  का भी बल हरते,

ना ऐसा रुख अपनाना है 

 मधु दीपक एक जलाना है !



10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (17-09-2022) को "भंग हो गये सारे मानक" (चर्चा अंक 4554) पर भी होगी।
    --
    कृपया कुछ लिंकों का अवलोकन करें और सकारात्मक टिप्पणी भी दें।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. दीप जल रहे जो नयनों में

    सुहास झरे मृदुल बयनों में,

    ऐसा इक राग सुनाना है

    हित दीपक एक जलाना है !

    सुंदर भाव लिए सुंदर सृजन।

    जवाब देंहटाएं
  3. करुणा, प्रेम, तपस, प्रार्थना

    दिलों में सोयी मधुर भावना,

    हौले से पुनः जगाना है !

    जय दीपक एक जलाना है ! - खूबसूरत कविता की श्रेष्ठतम पंक्तियाँ! इन पंक्तियों के लिए अंतस्तल से साधुवाद आदरणीया!

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  4. दीप जल रहे जो नयनों में

    सुहास झरे मृदुल बयनों में,

    ऐसा इक राग सुनाना है

    हित दीपक एक जलाना है !..
    बहुत सुंदर सकारात्मक भाव से परिपूर्ण उत्कृष्ट रचना।

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