गुरुवार, दिसंबर 2

विश्व विकलांग दिवस

 
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विश्व विकलांग दिवस

आज मैं आपका परिचय ‘मृणाल ज्योति’ से कराना चाहती हूँ, जो विकलांगों के पुनर्वास के लिये बनी एक गैर सरकारी संस्था है. जिसका मुख्य उद्देश्य है उन बच्चों की जल्दी से जल्दी पहचान करना जो किसी न किसी विकलांगता का शिकार हैं तथा उन्हें समुचित इलाज व शिक्षा की सुविधा देकर समाज में सम्मान पूर्वक जीने के योग्य बनने में मदद करना. आज यहाँ सभी लोग उत्साह से भरे हैं, पर सदा ऐसा नहीं होता, यहाँ आने वाले कुछ बच्चों का जीवन बेहद कठिन है, कुछ दिन पूर्व यहाँ ‘बढ़ते कदम’ नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, [एक जागरूकता अभियान जो पूरे देश में चलाया जा रहा है]

मृणाल ज्योति

ज्योति स्नेह की
आत्मीयता की, अपनेपन की
सहानुभूति की , सेवा की
झर-झर झरती स्वतः हृदय से
मृणाल ज्योति के !

एक प्रकाश स्तम्भ सम चमके
हरता तिमिर जहां से,
कुछ सूने अंतर भर उठते
कुछ परिवार स्नेह पा खिलते,
कुछ नन्हें मुस्काने पाते
कुछ यौवन कौशल पा जाते
आश्रय मिलता विकलांगों को
मुरझाने से बचपन बच जाते !

विद्या स्थल भी, कर्म स्थल भी
जीवन की कठोर सहता,
दर्द छुपाये अपने भीतर
कितनी पीड़ाएँ है सहता,
किन्तु न विचलित, सदा समर्पित
और बिखेरे ज्योति प्यार की
करुणा की, औदार्य की
मरहम रखता रिसते मन पर
झर झर झरता स्नेह हृदय से
मृणाल ज्योति के !

अनिता निहालानी
३ दिसंबर २०१०

5 टिप्‍पणियां:

  1. अनीता जी,

    ‘मृणाल ज्योति’ से परिचय करने का शुक्रिया.....खुदा इस नेक काम के लिए उन लोगों को और तौफिक दे......आमीन

    आपकी कविता ने पोस्ट में चार चाँद लगा दिए.....वैसे अनीता जी मैं भी दिल्ली में एक ऐसी ही संस्था से जुड़ा हुआ हूँ जो बच्चों के हित के लिए कार्य करती है|

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  2. अच्छा लगा परिचय ...ऐसे लोगों की ज़रूरत है विश्व को

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  3. संगीता जी , आपका आभार व धन्यवाद !
    इमरान जी, उस संस्था के लिये मेरी भी शुभकामनाएँ स्वीकार करें, बात गहरी हो तभी असर करती है, विधि सीखनी हो तो अच्छा रहेगा कि आप आर्ट ऑफ लिविंग का बेसिक कोर्स कर लें, ध्यान पढ़कर करने की बात नहीं है !

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  4. मृणाल जी को जानना अच्छा लगा, और अच्छी लगी आपकी कविता.

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  5. अनीता जी,

    ‘मृणाल ज्योति’ से परिचय करने का शुक्रिया

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