गुरुवार, दिसंबर 9

रिश्ता इन दोनों में क्या है

 
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रिश्ता इन दोनों में क्या है

सुंदर है जग, अति सुंदर
प्रकृति  रूप मनोहर सुंदर,
सुंदरतम पर एक चितेरा
प्रीत सुरभि का पुंज घनेरा I

थम ना जायें बाहर-बाहर
एक बार तो झाँकें भीतर,
कभी तो टूटे जीवन का क्रम
साथ-साथ ही मृत्यु का भ्रम I

आना-जाना, हंसना-रोना
मरना-जीना, पाना-खोना,
कैसा अद्भुत महाजाल है
मनमोहनी उसकी चाल है I

भीतर राज गुह्यतम बसते
एक वृक्ष पर दोनों रहते,
तोड़ आवरण जानें क्या है
रिश्ता इन दोनों में क्या है ?
अनिता निहालानी
०९ दिसंबर २०१०

5 टिप्‍पणियां:

  1. भीतर राज गुह्यतम बसते
    एक वृक्ष पर दोनों रहते,
    विरोधाभासी रिश्तो को बखूबी चित्रित किया है

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  2. भीतर राज गुह्यतम बसते
    एक वृक्ष पर दोनों रहते,
    तोड़ आवरण जानें क्या है
    रिश्ता इन दोनों में क्या है ?

    गहन जीवन दर्शन को रेखांकित करती भावपूर्ण प्रभावी प्रस्तुति..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. आना-जाना, हंसना-रोना
    मरना-जीना, पाना-खोना,
    कैसा अद्भुत महाजाल है
    मनमोहनी उसकी चाल है I
    सुंदर भावाभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  4. अनीता जी,

    बहुत सुन्दर कविता......भीतर और बाहर का अनोखा संगम......ये पंक्तियाँ बहुत पसंद आयीं-

    आना-जाना, हंसना-रोना
    मरना-जीना, पाना-खोना,
    कैसा अद्भुत महाजाल है
    मनमोहनी उसकी चाल है I

    उत्तर देंहटाएं