सोमवार, दिसंबर 27

एक और नया साल

एक और नया साल

नव-शिशु सा कोमल नव-कलि सा, यह नव-गीतिका सा श्यामल
मधुर रागिनी सा कानों को, सुख संदेसे देता प्रतिपल I

संघर्ष लिये कुछ स्वप्न नए, नव चुनौतियाँ कुछ आशाएं
लो फिर आया है साल नया, कुछ नयी रचाने गाथाएं I

जीवन हर क्षण नया हो रहा, काल न जाने कहाँ खो रहा
लाखों बरस समाये भीतर, सृष्टिकर्ता नया बो रहा I

नए बरस का अर्थ यही है, नया नया यह जग हो जाये
पीड़ा जिसने दी हो अब तक, अपना वह हर मन खो जाये I

एक नया मौका जीने का, फटे हुए दामन सीने का
एक बार खुल कर हँसने का, झटक पुराना नव चुनने का I

अब तक जो पाया सो पाया, नया साल कुछ देने आया
हिम्मत से जो हाथ बढाए, हर भय जिसने दूर भगाया I

तोड़ के सारे झूठे बंधन, छोड़ के मन के सब अवगुंठन
भरे पुलक उर में नयनों में, उत्सुक हो करे अभिनन्दन I

सृजन करे आनंद उगाए, गहराई से मोती लाए
हँसी से सींचे फसल प्रेम की, पलकों से खुशियाँ बिखराए I

समझ इशारा पल-पल जी ले, नित नूतन आनंद को पी ले
सत्यम, शिवम, सुन्दरम के हित, सजा के धरती अम्बर छू ले I

अनिता निहालानी
२७ दिसंबर २०१०

4 टिप्‍पणियां:

  1. अनीता जी,

    नव वर्ष के शुभ आगमन पर आपकी ये पोस्ट बहुत सुन्दर लगी......

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  2. सृजन करे आनंद उगाए, गहराई से मोती लाए
    हँसी से सींचे फसल प्रेम की, पलकों से खुशियाँ बिखराए ।

    बहुत ही खूबसूरत अंदाज है नववर्ष की शुभकामनाओं का ...।

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  3. तोड़ के सारे झूठे बंधन, छोड़ के मन के सब अवगुंठन
    भरे पुलक उर में नयनों में, उत्सुक हो करे अभिनन्दन I
    ....
    बहुत सुन्दर..नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. जीवन हर क्षण नया हो रहा, काल न जाने कहाँ खो रहा
    लाखों बरस समाये भीतर, सृष्टिकर्ता नया बो रहा I
    ---बहुत सटीक वर्णन नए साल का.मुबारक हो हर क्षण .

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