शुक्रवार, जुलाई 18

तो खिलेगी पाँखुरी

तो खिलेगी पाँखुरी


बांस की इक पोंगरी हम
तुम बजाओ, तो बनेगी बांसुरी

एक बिखरा गीत जैसे
इक अधूरी सी कहानी
क्रम नहीं सतरों में कोई
तुम लिखो, तो बहेगी माधुरी !

चंद श्वासें पास अपने
पल रहे कुछ खास सपने
किस चरण पर हों समर्पित
तुम धरो, तो खिलेगी पाँखुरी !

बांस भी अपना नहीं है
श्वास भी पायी तुम्हीं से
तुम्हें अर्पित शै तुम्हारी
 तुम गहो, तो सधेगी रागिनी !



4 टिप्‍पणियां:

  1. तुम्हीं से सार्थक, तुम्हीं से है सगुन,
    अन्यथा ये था वृथा जीवन !

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  2. तुम्ही तो जीवन हो, तुम्ही से जीवन है.
    भावविभोर कर गए आपके सुन्दर शब्द …आभार

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  3. प्रतिभा जी व संध्या जी, स्वागत व आभार !

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