गुरुवार, जुलाई 31

वही मुक्त है शेष बो रहे



वही मुक्त है शेष बो रहे


जो उसका है उसके हित है
वही जागता शेष सो रहे,
मधुरिम सी जो कृपा बरसती
वही पा रहा शेष खो रहे !

उसका होना ही होना है
वही मुक्त है शेष बो रहे,
काटेंगे कर्मों की खेती
कोरा है वह शेष धो रहे !

जो उसके चरणों में झुकता
वही उठा है शेष ढो रहे,
बैठ गया जो वह पहुंचा है
वृष कोल्हू के शेष जो रहे !

जिसने खुद के भीतर झाँका
पाया उसने शेष तो रहे,
जुड़ा एक अजस्र स्रोत से
बस यूँ ही से शेष हो रहे !

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति।

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  2. आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 1 . 8 . 2014 दिन शुक्रवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  3. उस स्रोत से जुड़ कर शेष हो रहने का प्रश्न समाप्त हो जाता है.

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  4. कालीपद जी, अनु जी, आशीष जी, प्रतिभा जी, राहुल जी आप सभी का स्वागत व आभार !

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  5. बहुत सुन्दर रचना
    उत्कृष्ट शब्दों का संयोजन

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  6. बहुत खूब
    एक सलाह: कठिन शब्दों के अर्थ भी लिख दे तो मेरे लिए बेहतर होगा :)

    आभार

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