सोमवार, जुलाई 7

अब



अब

बहुत हुआ खेल, अब चलो
कुछ काम की बातें कर लें
उससे पहले कि पर्दा उठ जाये
उससे दोस्ती बना लें
कहीं ऐसा न हो, खो जाये
एक श्वास व्यर्थ ही
अनंत के इस गह्वर में
या फिर चूक जाये एक बार फिर
कोई गीत रचे जाने से एक क्षण पूर्व
खो जाये कोई उजास जलने से पूर्व ही
या कली की मौत हो फूल बनने से पहले
और उससे दोस्ती बनाने के बाद
जो हो सो हो
 जो होना है सो हो जाये ! 

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  2. फिर जो हो सो हो चलो इस पल को सहेजो समेटो बनो मेरे कन्हैयाँ

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  3. स्वागत व आभार, वीरू भाई व अमृता जी !

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