शनिवार, जनवरी 1

मन जैसे मछली सागर में

मन जैसे मछली सागर में

सुख के साथ छिपा है दुःख भी
जाने यह तो संभले मानव,
सुख के पीछे यूँ न भागे
देव न सही, बने न दानव !

प्राण ऊर्जा नभ में बिखरी
मन जैसे मछली सागर में,
व्यर्थ माँगते व्यर्थ खोजते
भरने खाली उर गागर में !

यहीं छिपा वह रत्न अनोखा
सहज प्राप्य वह छिपा कहाँ है,
मन जो घूमे जग में हर पल
लौटे घर हर खुशी वहाँ है !

थम के देखे हंसेगा मानव
हद है अपने इस प्रमाद की,
जिसको खोजा फिरते थकते
सम्पदा वह निज की ही थी !

कैसा अद्भुत खेल रचा है
मन ने कैसा जाल बिछाया,
झूठमूठ ही भरमा खुद को
घर से बाहर ही भटकाया !

स्वयं ही है हर रूप में मानव
स्वयं को ही है दूर किया,
स्वयं ही बोये पथ में काटें
स्वयं को ही मजबूर किया !

अनिता निहालानी
१ जनवरी २०११

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छी कविता.

    आप को सपरिवार नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .

    सादर

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  2. स्वयं ही है हर रूप में मानव
    स्वयं को ही है दूर किया,
    स्वयं ही बोये पथ में काटें
    स्वयं को ही मजबूर किया

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...नव वर्ष की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेहतरीन रचना। बधाई। आपको भी नव वर्ष 2011 की अनेक शुभकामनाएं !

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  4. आपको और आपके परिवार को मेरी और मेरे परिवार की और से एक सुन्दर, सुखमय और समृद्ध नए साल की हार्दिक शुभकामना !

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  5. सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु।
    सर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु॥
    सब लोग कठिनाइयों को पार करें। सब लोग कल्याण को देखें। सब लोग अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र आनन्दित हों
    सर्वSपि सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामयाः।
    सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद्‌ दुःखभाग्भवेत्‌॥
    सभी सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो।
    बहुत अच्छी प्रस्तुति। नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं!

    साल ग्यारह आ गया है!

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  6. HAPPY NEW YEAR 2011
    WISH YOU & YOUR FAMILY,
    ENJOY,
    PEACE & PROSPEROUS
    EVERY MOMENT SUCCESSFUL
    IN YOUR LIFE.

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  7. bahut hi sundar likhti hain aap.
    bahut achhee kavita .

    नववर्ष २०११ की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    .......................
    ऑडियो क्विज़
    हर रविवार प्रातः 10 बजे

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  8. सुख के पीछे यूँ न भागे
    देव न सही, बने न दानव !
    बहुत अच्छी कविता.
    नववर्ष की शुभकामनाएँ...

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  9. कैसा अद्भुत खेल रचा है
    मन ने कैसा जाल बिछाया,
    झूठमूठ ही भरमा खुद को
    घर से बाहर ही भटकाया !


    बहुत सही लिखा है -
    सुंदर रचना -
    नववर्ष की शुभकामनाएं

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  10. स्वयं ही बोया , स्वयं ही काटा ...
    सही कह दिया ...

    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

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  11. गहरे अर्थो को समेटती एक सशक्त रचना.

    अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
    तय हो सफ़र इस नए बरस का
    प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
    सुवासित हो हर पल जीवन का
    मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
    करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
    शांति उल्लास की
    आप पर और आपके प्रियजनो पर.

    आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर,
    डोरोथी.

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  12. अनीता जी,

    बेहतरीन रचना.......इस एक लाइन में सब कुछ कह दिया है आपने.....

    देव न सही, बने न दानव

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