मंगलवार, अगस्त 26

ये नन्ही नन्ही चिड़ियाएँ


ये नन्ही नन्ही चिड़ियाएँ


श्वेत और श्याम पर हैं जिनके
चुन-चुन कर लाती है घास की लतरें
छोड़ आती हैं एक घन वृक्ष की
शाखाओं और पत्तियों में
एक नीड़ का फिर निर्माण हो रहा है
सृष्टि चक्र यूँ ही बहा जा रहा है
तांक-झांक करता है काग एक वहाँ आकर
जाने क्यों चिड़ियाएँ अगले ही पल नजर नहीं आतीं
शायद गयी हैं दूर लम्बी उड़ान पर
अथवा तो खोज में किसी कीट या पदार्थ के ! 

12 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन यात्रा अनवरत चलती जाए ....!!

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के लिए चुरा ली गई है- चर्चा मंच पर ।। आइये हमें खरी खोटी सुनाइए --

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  3. कल 27/अगस्त/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  4. यही सृष्टि चक्र... सुन्दर रचना, बधाई.

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  5. यशवंत जी, अनुपमा जी, माहेश्वरी जी, शबनम जी व रविकर जी आप सभी का स्वागत व आभार !

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