एक अनंत गगन है भीतर
नाच उठे जो कैद है भीतर
खेल चल रहा कोई सुंदर,
एक ऊर्जा गाती प्रतिपल
एक ऊर्जा सुनती हर स्वर !
जीवन एक सुहृद मित्र सा
प्रतिक्षण ऊंचा ही ले जाता,
एक अनंत गगन है भीतर
फिर क्यों घर का आंगन भाता !
तोड़ के सारे झूठे बंधन
अभय प्राप्त यदि कर लेगा मन,
नई नई राहें खोजेगा
सहज उड़ान भरेगा चेतन !
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