pyar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
pyar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, फ़रवरी 5

पुण्य सम पावन यह प्यार


पुण्य सम पावन यह प्यार

अनसुनी जाने न पाए
मीत की कोई पुकार,
कौन जाने कब मिलेगी
झूमती गाती बहार !

कौन जाने कब खिलेगा
 पुण्य सम पावन यह प्यार !

आँख भर के देख लो
बूंद कितनी देर ठहरी,
सप्तवर्णी अमिय धारे
ज्यों मधुर संगीत लहरी !

हो तिरोहित पूर्व उसके
थाम लो बन जाओ धार !
कौन जाने कब खिलेगा?
 पुण्य सम पावन यह प्यार !

खोजने का तुम जिसे
कर रहे अभिनय युगों से,
पांव रखे हो उसी पे
बँध अदेखी बेड़ियों से !

खोल दृग देखो यदि तुम
जग किये सोलह सिंगार !
कौन जाने कब खिलेगा?
 पुण्य सम पावन यह प्यार !

अनिता निहालानी
५ फरवरी २०११