पुण्य सम पावन यह प्यार
अनसुनी जाने न पाए
मीत की कोई पुकार,
कौन जाने कब मिलेगी
झूमती गाती बहार !
कौन जाने कब खिलेगा
पुण्य सम पावन यह प्यार !
आँख भर के देख लो
बूंद कितनी देर ठहरी,
सप्तवर्णी अमिय धारे
ज्यों मधुर संगीत लहरी !
हो तिरोहित पूर्व उसके
थाम लो बन जाओ धार !
कौन जाने कब खिलेगा?
पुण्य सम पावन यह प्यार !
खोजने का तुम जिसे
कर रहे अभिनय युगों से,
पांव रखे हो उसी पे
बँध अदेखी बेड़ियों से !
खोल दृग देखो यदि तुम
जग किये सोलह सिंगार !
कौन जाने कब खिलेगा?
पुण्य सम पावन यह प्यार !
अनिता निहालानी
५ फरवरी २०११