दीवाली के दीपक
दिलों को भी रोशन किया चाहते हैं !
मिटी कालिमा रात जगमग हुई ज्यों,
ज्ञान दीपक हृदय में बसा चाहते हैं !
श्रद्धा जहाँ गहरी रच–बस गयी हो,
दीये उस उर में रहा चाहते हैं !
जल उठी जिस तरह लौ से लौ झूम कर,
उजाले दिलों के बहा चाहते हैं !
जहाँ स्वच्छता हो वहीं वास सुख का,
दीवाली के दीपक कहा चाहते हैं !
अनिता निहालानी
३ नवम्बर २०१०