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बुधवार, नवंबर 3

दीवाली के दीपक


दीवाली के दीपक



उजाला बिखेरा धरा पर दियों ने,
दिलों को भी रोशन किया चाहते हैं !

मिटी कालिमा रात जगमग हुई ज्यों,
ज्ञान दीपक हृदय में बसा चाहते हैं !

श्रद्धा जहाँ गहरी रच–बस गयी हो,
दीये उस उर में रहा चाहते हैं !

जल उठी जिस तरह लौ से लौ  झूम कर,
उजाले दिलों के बहा चाहते हैं !

जहाँ स्वच्छता हो वहीं वास सुख का,
दीवाली के दीपक कहा चाहते हैं !

अनिता निहालानी
३ नवम्बर २०१०