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बुधवार, दिसंबर 8

मृत्यु ! तुम्हारा स्वागत है

मृत्यु ! तुम्हारा स्वागत है

तुम्हीं सत्य हो इस जीवन का

मिलना तुमसे सबको होगा,

तुमसे ही जीवन, जीवन है

यह सच इक दिन जाहिर होगा !


लेकिन तब, जब श्वासें उखड़ीं

बोल अटक जायेंगे मुख के,

भाव सिमट के आँखों में भी

रह जायेंगे भीतर घुट के !


मृण्मय देह साथ छोड़ेगी

जिसका लिया सहारा  हमने,

चिन्मय भीतर छिपा रहेगा

जाना कभी न जिसको हमने !


मिट्टी-मिट्टी में मिल जाये

परिचय मृत्यु से क्यों न कर लें,

जीते जी उसको पहचानें

दिव्य ऊर्जा भीतर भर लें !


 चला गया जो पार मृत्यु के

जीवन महा मिलेगा उसको,

खुद मर के जो पुनः जन्मता

कब कोई मार सके उसको !



अनिता निहालानी
८ दिसम्बर २०१०