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मंगलवार, अगस्त 18

जन-जन का मन भी प्रज्ज्वल हो

जन-जन का मन भी प्रज्ज्वल हो


नीले नभ में देख तिरंगा  

हर भारतवासी को गर्व है, 

वीरों के बलिदानों से ही 

आया आज़ादी का पर्व है !


भारत की मिट्टी चंदन, भरा

 ऋषियों के तप से कण-कण है, 

 सींचा श्रम की धाराओं से,

 श्रमिकों का भी हम पर ऋण है !


भारत का हर युवा व बालक

 सत्य और सेवा का पथ पर,

देशप्रेम अंतर में भर ले 

जाति, धर्म के भेद भुलाकर !


नदियाँ निर्मल, बढ़े वन भूमि

हर भारतीय शिक्षा पाये, 

सदा बढ़े नारी का गौरव

भारत जग को राह दिखाये !


केवल उत्सव नहीं यह दिवस

 ज़िम्मेदारी याद दिलाता, 

तज प्रमाद कर्त्तव्य निभाये 

वही देश का मान बढ़ाता ! 


मिलकर यह संकल्प करें हम 

 भारत का भविष्य उज्ज्वल हो,

 शान तिरंगे की नित ऊँची 

जन-जन का मन भी प्रज्ज्वल हो !

 

रविवार, अगस्त 16

स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाएँ

स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाएँ  


धर्म व अर्थ, काम और मोक्ष 

चारों का पुरुषार्थ कर रहा,  

भारत विकसित देश बनेगा 

हर कार्य उस हितार्थ कर रहा !


गौरवशाली परंपरा को 

जारी रखता आया भारत, 

योग-ध्यान सबको सिखलाकर 

विश्व-मित्र बन गया है भारत !


राजमार्ग राष्ट्रीय बन रहे 

 हवाई अड्डे, मेट्रो, बंदर,

नयी-नयी रेलें नित चलतीं 

हरित ऊर्जा बढ़े निरंतर ! 


कृषकों का सम्मान बढ़ाया

डिजिटल भारत राह दिखाये, 

गगनयान अभियान चल रहा 

  अस्त्र-शस्त्र स्वदेशी बनाये ! 


एआई के क्षेत्र में आगे 

हर किशोर, युवा सक्षम है, 

भारत की नज़रें आगे हैं 

हर सीमा उसके हित कम है !


 

रविवार, जनवरी 25

बहे अटूट प्रेम की धारा

77वें  गणतंत्र दिवस के अवसर पर 


भारत भू की गौरव गाथा 

आज सुनाने का दिन आया, 

 संविधान का पर्व मनाते

जिसको इस दिन था अपनाया ! 


  पावन संस्कृति अति पुरातन

विश्व साथ दे हर उत्सव में, 

भजन क्लबिंग कर युवा आज के 

भक्तिभाव जगायें उर में !


 वन्य प्रांत भी बढ़ता जाता 

नदियाँ भी नव जीवन पाएँ,

अक्षय ऊर्जा का प्रयोग कर 

ग्लोबल वार्मिंग नित घटाएँ !

 

उत्तर दिशा विराट हिमालय 

सागर तट सुंदर दक्षिण में, 

 भारत की सीमाएँ सुरक्षित 

मार्ग दिखाता नवाचार में, 


 जहाँ कहीं भारतवासी हों

विजयी तिरंगा जब फहराते, 

बहे अटूट प्रेम की धारा 

अनायास ही दिल जुड़ जाते !


विकसित राष्ट्र की नींव डल रही 

दूर बहुत अभी जाना है, 

 पाएँ सभी अधिकार समान 

यही मूल्य नित अपनाना है !


शुक्रवार, अगस्त 15

पंख मिले इसके सपनों को


भारत के उन्यासिवें स्वतंत्रता दिवस पर 

हार्दिक शुभकामनाओं सहित 


रोक सकेगा नहीं विश्व यह 

भारत के बढ़ते कदमों को, 

विश्व आज पीछे चलता है 

पंख मिले इसके सपनों को !


जहाँ कदम रखे ना किसी ने 

दूर चाँद को छू कर आया, 

देश की सीमाएँ सुरक्षित 

दुश्मन जिसको भेद न पाया !


हरित ऊर्जा में है अग्रिम 

पर्यावरण की अति परवाह, 

विकसित होने की भारत के 

जर्रे-जर्रे में भरी चाह ! 


अध्यात्म का मार्ग दिखलाता 

योग सभी को सिखलाया है, 

संपन्नता व समृद्धि में भी 

पहले पाँच में यह आया है !


लेते हैं संकल्प आज, हर 

 क्षमता का उपयोग करेंगे, 

भारत के बढ़ते कदमों को 

कभी न पीछे हटने देंगे !


बुधवार, मई 7

युद्ध

युद्ध 


छाने लगे युद्ध के बादल 

पर भय नहीं दिल में किसी के

अटूट भरोसा है भारतीय सेना पर 

शौर्य और वीरता के चर्चे सुने 

देखी उनकी दरियादिली 

बन सहायक अन्य देशों के 

शांति सेना में बहादुरी के परचम लहराते 

निश्चिंत है हर भारतीय 

युद्ध सीमा पर लड़ा जाएगा 

भारत को अपना दुश्मन मानता है 

उस पाकिस्तान को 

कड़ा जवाब दिया जाएगा 

  प्रधानमंत्री संयत

देश की योजनाओं को 

करते कार्यान्वित 

रक्षा मंत्री स्थिर 

देते देश को आश्वासन 

विपक्षी प्रश्न पूछ-पूछ 

वातावरण को हल्का बनायें 

यदि कुछ न कहें तो 

कहीं लोग उनको भूल न जायें 

 तंग आ चुकी जनता 

आतंक के आकाओं से 

अब आर-पार की लड़ाई होनी है 

 राह की हर बाधा मिटा 

देश को नई फसल बोनी है !


शनिवार, सितंबर 14

हिन्दी दिवस पर

हिन्दी दिवस पर 

हिन्दी मात्र एक भाषा नहीं 

एक पुल है

यह जोड़ती है भारत ही नहीं विश्व को 

इतिहास, पुराण और संस्कृति के 

अनमोल खजानों से 

कबीर, सूर और तुलसी के साथ 

अनगिनत साहित्यकारों के फसानों से  

हिन्दी संस्कार की भाषा है 

अति सरल, मधुर, प्यार की भाषा है 

हाँ, नहीं बन सकी यह 

विज्ञान और व्यापार की भाषा 

या शायद रोज़गार की भाषा 

इसलिए आज अपने ही घर में बेगानी है 

इसकी शुद्धता और मर्यादा की 

कहीं-कहीं हो रही हानि है 

भावनाओं को शब्द देती 

हिन्दी प्रीत सिखाती है 

पोषित करती मनों को 

आगे ले जाती है 

हिन्दी माँ है, समझाती है 

काव्य रस का पान कराती है 

आज़ादी का संघर्ष 

इसके बलबूते लड़ा गया 

उत्तर को दक्षिण से मिलाती है 

 तय किया है एक लंबा सफ़र हिन्दी ने 

अभी और आगे जाना है 

देश विदेश में इसका मान और सम्मान बढ़ाना है 

हिन्दी को उसकी क्षमता की 

पहचान दिलानी है  

शिशुओं को शुद्ध हिन्दी सिखानी है 

क्योंकि हिंदुस्तान की शान है हिन्दी 

भारत की पहचान है हिन्दी !


गुरुवार, अगस्त 15

स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ

स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ 


गगन  रंगा  केसरिया आज 

प्रकृति  भी फहराये तिरंगा, 

माटी का इक खंड नहीं है 

भारत भू है दिल धरती का !


देश आज आगे बढ़ता है 

बाधायें कितनी भी आएँ, 

क़ुर्बानी देकर जो पायी 

आज़ादी नव स्वप्न दिखाए !


सागर की धुर गहराई हो 

या अंतरिक्ष की ऊँचाई, 

देश-विदेश भारतीयों ने 

प्रतिभाओं की अलख जगायी !


माना अभी राह लंबी है

विकसित होने में भारत के,

इकजुट होकर पूर्ण करेंगे 

स्वप्न सभी भारतीय मिल के !


सोमवार, जून 10

सभी दलों से देश बड़ा है

सभी दलों से देश बड़ा है 


लोकतंत्र की विजय हुई है 

हारे-जीततें होंगे लोग, 

देश समन्वय के रस्ते  पर 

आश्वासित हुए सारे लोग !


तय कर दिया चुनावों ने यह 

राजनीति से बड़े हैं राम,  

मिल-जुल कर ही बढ़ना आगे 

संविधान का यही  पैग़ाम !


सभी दलों से देश बड़ा है 

सेवा का जो अवसर देता, 

सरकारें आये जायेंगी 

युगों-युगों से भारत माता !


गुरुवार, दिसंबर 21

भारत का प्रकाश फैलेगा

 भारत का प्रकाश फैलेगा 

युद्धों की ज्वाला में जलता 

विश्व छिपा है अंधकार में,  

 भारत का प्रकाश फैलेगा 

शांति सिखाता हर विचार में ! 


पर्यावरण की धुन जिन्हें है 

राकेट-गोले बम दागते, 

घायल करके धरती का दिल 

मासूमों का रक्त बहाते ! 


 आश्रय में रहे प्रकृति माँ के

मानव का विकास तब संभव,  

बहे अनंत कृपा अनंत की 

जिसकी कृति यह अति सुंदर भव !


 नये वर्ष में जागे विवेक

विध्वंस न हो नव सृजन घटे,

हो उत्कर्ष सदा मूल्यों का 

साहचर्य का उल्लास बढ़े !


मंगलवार, दिसंबर 12

अमृत पुत्र हैं भारतवासी

अमृत पुत्र हैं भारतवासी

सुख की अभिलाषा ने मारा 

दुख ने सदा सचेत किया है,  

अमृत पुत्र हैं भारतवासी 

जहाँ शिवा ने गरल पिया है ! 


जग के लिए प्रकाश बना जो 

सत्य की नित मशाल जलाता, 

मिथ्या मत  के आडंबर को 

तजने का विज्ञान सिखाता !


घट-घट में निवास देवों का 

वासुदेव कण-कण में बसते , 

ऋत की विमल धार बहती है 

छद्म वेश धारी कब टिकते !


अंधकार में भटक रहा जग 

जीवन का यह मर्म जानता, 

युद्ध और हिंसा से जन्मे 

मतांतरों का हश्र जानता !


ज्ञान, प्रेम, सामर्थ्य, पूर्णता 

कलावंत की होती पूजा, 

मानव मन की थाह न मिलती 

ईश को भी न माने दूजा !


केंद्र कला के, सुर-भाषा के 

सभी उन्हीं देवों से प्रकटे, 

भाव ह्रदय के, लक्ष्य धरा के 

अम्बर से तारों सम लटके !


सजगता  साधना करवाता 

दिव्यता का भाव प्रकटाए, 

जीवन को इक दिशा दिखाकर 

सौंदर्य से प्रीत सिखलाये !