शुक्रवार, मई 1

बुद्ध पूर्णिमा और मई दिवस


बुद्ध पूर्णिमा और मई दिवस 

मार्क्स ने बढ़ाया मज़दूरों का आत्म सम्मान

जब संगठित होने का मंत्र दिया उन्हें

बुद्ध ने दिखाया मुक्ति का अष्टांगिक मार्ग 

जब विपासना ध्यान सिखाया 

 राष्ट्र के विकास में 

बराबर का भागीदार है श्रमिक 

उसे मिले समुचित प्रतिदान

श्रावक दिशा दिखाता समाज को 

जैसे मिलता उसे सम्मान 

 चिलचिलाती धूप में घंटों श्रम करता 

काट कर चट्टानों को 

सुरंग बिछाता, रखता

आलीशान अट्टालिकाओं की नींव श्रमिक 

श्रावक घंटों ध्यान साधना कर 

अपने भीतर जाता 

वास्तविक प्रेम और करुणा के स्रोत छिपे हैं जहाँ 

कुछ बूँदें जग में बहाता 

दोनों ही आदर के पात्र हैं 

समाज ऋणी है दोनों का !