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गुरुवार, अगस्त 11

एक अनूठा उत्सव आया


एक अनूठा उत्सव आया


बरस-बरस गयी कृपा देव की श्रावण मास पूर्ण हुआ जब, लेने लगा होड़ बदली से पूर्ण चन्द्र खिल आया नभ पर ! भारत की इस पुण्य भूमि पर एक अनूठा उत्सव आया, प्रेम ही जिनका आदि-अंत है संबंधों को निकटतम लाया ! पूर्ण वर्ष का भाव छिपा जो भीतर गहन हुआ अब प्रकटा, बहन बाँधती रक्षा बंधन भाई का भी दिल भर आया ! आशीषें हैं और दुआएँ तिलक लगाती दिए मिष्ठान, अनगिन खुशियाँ बहना पाए बांधें राखी सँग मुस्कान ! मन ही मन वारी है जाती बहन का दिल हुआ गर्वीला, कितनीं यादें उर में आतीं लख भाई का ढंग हठीला ! जो कुछ पाया है भाई से धीरे से माथ से लगाती, निज अंतर हृदय की ऊष्मा बिन बोले चुपचाप लुटाती !



बुधवार, अगस्त 10

रक्षा बंधन

रक्षा बंधन 


यह सनातन संस्कृति की 

रक्षा का सूत्र है 

जिसे बचाया अनेक युगों से 

भाई-बहनों की पावन प्रीत ने 

 जीवित रखी वह परंपरा 

जहाँ घर लौटेगी पुत्री 

और स्वागत करेगी श्रावण पूर्णिमा  

वर्षा  ऋतु की आने कठिनाइयों को भुला 

आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है 

इस एक उत्सव में

 छुपे हैं अनेक उत्सव 

जो उत्साह से भर देता है

सीमा पर तैनात वीर जवानों को !

सूत या रेशम की 

छोटी सी एक डोरी 

कह देती है वह 

 जो शब्द नहीं कह सकते 

मस्तक पर लगाया 

 रोली अक्षत का तिलक

ले जाए वह संदेश 

जो कर न पाए सम्प्रेषित

दुनिया की कोई भाषा 

शायद प्रतीकों में छुपा है 

इस जीवन का सत्

नेह का मर्म और संबंधों की मिठास 

घंटों तक किए वार्तालाप भी 

एक स्नेहिल दृष्टि से कम हैं   

यदि कोई पढ़ सके 

मौन की अनुपम भाषा 

राखी सोने-चाँदी की 

या कते सूत की 

वही जानते हैं उसकी क़ीमत 

जो उसमें भेजी 

अंतर की नमी को 

महसूस कर ले 

भावों की महीन  तरंगें 

 छू जाए जिन्हें !




सोमवार, अगस्त 6

राखी के कोमल धागे





राखी के कोमल धागे




आया अगस्त
अब दूर नहीं श्रावणी पूनम
उत्सव एक अनोखा, जिस दिन
मधुर प्रीत की लहर बहेगी
हृदय जुड़ेंगे, बांध रेशमी तार
उरों में नव उमंग, तरंग जगेगी
और सजेंगे घर-घर में, दीपक-रोली के थाल
देकर कुछ उपहार हथेली में, बहना की
मुस्काएगा भाई, गुंजित होंगी सभी दिशाएं
बार-बार उत्सव यह आये !  

किन्तु दूर हैं जो भी प्रियजन
भेज राखियाँ, मधुर संदेशे
मना ही लेंगे रक्षा बंधन !
तिलक लगा मस्तक पर अपने
बाँध लीजिये राखी कर में
संग बंधी है शुभ कामना
पगी प्रीत में मधुर भावना
जीवन का हर पल सुखमय हो
हर इक उत्सव मंगलमय हो !