स्मित लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
स्मित लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, अक्टूबर 13

अहंकार छाया है

अहंकार छाया है


इच्छा जब सिमट गयी  

 खुद का भान हुआ,  

 करने की फ़ांस मिटी 

दीप जल ध्यान का !


वहीं समाधान मिला 

जीवन सवाल का, 

स्वयं की ही खोज थी 

बेबूझ बात का !


अधरों पर स्मित जागा 

अंतर  चैन बहा, 

किस भ्रम में खोया मन 

क्यों यह खेल सहा !


मन ही तो माया है 

राज यह खुल गया, 

अहंकार छाया है 

भय का सबब मिटा !