नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
अहंकार छाया है
इच्छा जब सिमट गयी
खुद का भान हुआ,
करने की फ़ांस मिटी
दीप जल ध्यान का !
वहीं समाधान मिला
जीवन सवाल का,
स्वयं की ही खोज थी
बेबूझ बात का !
अधरों पर स्मित जागा
अंतर चैन बहा,
किस भ्रम में खोया मन
क्यों यह खेल सहा !
मन ही तो माया है
राज यह खुल गया,
भय का सबब मिटा !