शनिवार, दिसंबर 4

सेहत का है राज यही, नहीं भूलना इन्हें कभी


सेहत का है राज यही, नहीं भूलना इन्हें कभी 


समय पे सोना औ' जागना 

बात-बात पर दुखी न होना, 

थोड़ा सा ही पौष्टिक भोजन 

आसन, प्राणायाम साधना !


दर्द कभी हो कहीं देह में 

यह तन की पुकार है सुनना,  

उलझे से हों ग़र विचार तो 

यह मन का विकार है गुनना !


क्रोध जगे तो ज़रा ठहरना 

वातावरण प्रदूषित करता, 

गहरी चंद सहज श्वासें ले

अंतर्मन को ख़ाली करना !


जीवन एक उपहार प्रभु का 

सत्यम शिव सुंदर जब होगा, 

मन उत्साहित शरीर ऊर्जित 

हर पल तब ही सुखद बनेगा !





14 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 05 दिसंबर 2021 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  2. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार
    (5-12-21) को "48वीं वैवाहिक वर्षगाँठ"
    ( चर्चा अंक4269)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

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  3. क्रोध जगे तो ज़रा ठहरना

    वातावरण प्रदूषित करता,

    गहरी चंद सहज श्वासें ले

    अंतर्मन को ख़ाली करना !..क्या बात कही दीदी,बहुत सुंदर प्रेरक अभिव्यक्ति ।

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  4. बहुत ही उम्दा सृजन आदरणीय मैम

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सी छोटी छोटी बातें सेहत के लिए अच्छी हैं और सभी से कुछ न कुछ सकारात्मक मिलता है ... सुन्दर रचना ...

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