नये वर्ष के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ
नये साल में निर्दोष न मारे जायें
हो नहीं अन्याय का शिकार भी कोई,
बंद हों युद्ध, करें निर्माण देशों का
हो हितैषी ‘ए आइ’ न छल करे कोई !
मिटे विषमता, हर भेद मिटे दुनिया से
हर इंसान, इंसान की क़ीमत जाने,
दिल की गहराई में झांक सके मानव
नहीं किसी को, कभी भी पराया माने !
एक ही लौ, जल रही है हरेक दिल में
संग शीतलता के जो उजाला देती,
नूतन वर्ष में बने वही पथ प्रदर्शक
युगों-युगों से जो सदा हौसला देती !
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आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 12 जनवरी 2026 को लिंक की जाएगी है....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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बहुत बहुत आभार रवींद्र जी!
हटाएंसुंदर | नव वर्ष मंगलमय हो |
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
हटाएंएक आश्वासक एवं आशाप्रद सकारात्मक रचना, सादर.
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
हटाएंस्वागत व आभार!
हटाएंबढ़िया
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
हटाएंहम सब की यही प्रार्थना है अनिताजी.
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार जितेंद्र जी !
हटाएंबहुत सुंदर कविता ।
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
हटाएंबहुत खूबसूरत रचना
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
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