बुधवार, जनवरी 28

समुद्री यात्रा

समुद्री यात्रा


समुन्दर की असंख्य लहरों पर 

डोलती, झूमता हुआ मस्त खटोले सी 

बढ़ता जाता है जहाज 

आकाश और समुंदर जहाँ मिलते हैं 

क्षितिज पर धूमिल हो गया है भेद 

आकाश छू रहा है लहरों को 

या लहरें उठती चली गई हैं उस तक 

सर्पिली लहरें फेन बनाती हुई नाच रही हैं 

जो बिखर जाता है पल भर में 

जीवन की नश्वरता का बोध कराता हुआ 

 शाश्वत है जल पर लहरें नश्वर 

ज्यों शाश्वत है जीवन, जगत नश्वर 

सामने बिछी है जल की अनंत राशि 

 आह्लादित हैं सैकड़ों दिल जिसे निहार

 संजो रहे हैं मनों में 

यह अनुभव शायद पहली बार !



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें