असली घर है रिक्त आकाश
घर की चिंता करते करते
समय और शक्तियाँ लगायी,
साथ नहीं जाने वाला है
धोखा देगा, पड़े सुनायी !
दीवारों से नहीं बना है
असली घर है रिक्त आकाश,
वातावरण विशुद्ध बना लें
अंतर से उमड़ पड़े प्रकाश !
वायु शुद्ध हो, प्राण शुद्ध हों
भाव विमल मुस्कान सजीली,
घर के भीतर रहने वाला
हर इक छेड़े तान सुरीली !
प्रेम बहे कोई द्वन्द्व न हो
जीवन इक वरदान बनेगा,
पलकों में शुभ स्वप्न सजेंगे
सम्मुख वही अनाम रहेगा !
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