लो आ गया वसंत
धूप रानी हो गयी
रुत सुहानी हो गयी
बाग में कलियाँ खिलाता
छा गया वसंत
लो आ गया वसंत !
खुशबुएँ तन पर लपेटे
रंग अनगिन भी समेटे
भू सजाता मुस्कुराता
भा गया वसंत
लो आ गया वसंत !
भ्रमर गूँजते विकल
तितलियों के उड़ें दल
कुम्हलाया मुरझाया मन
खा गया वसंत
लो आ गया वसंत !
मंजरी मदहोश हुई
मस्तियों की कोष हुई
आम्र वन में खिलखिलाता
सा गया वसंत
लो आ गया वसंत !
.jpg)