गणित लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गणित लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, जून 29

विपरीत का गणित

विपरीत का गणित 

जागरण यदि स्वप्न सा प्रतीत हो 

तो स्वप्न में जागरण घटेगा 

 कुरुक्षेत्र बन जाये धर्मक्षेत्र, तो 

हर कर्म से मंगल सधेगा 

मन में विराट झलके 

तो लघु मन खो जाएगा 

जैसे बूँद में नज़र आये सिंधु 

तो सिंधु हथेली में समा जायेगा 

यहाँ विपरीत साथ-साथ चलते हैं 

धूप-छाँव एक वट के नीचे पलते हैं 

श्रमिक की नींद बड़ी गहरी है 

मौन में छिपी स्वरलहरी है !


गुरुवार, अप्रैल 23

घर पर ही रहें

घर पर ही रहें


जिंदगी गणित के सूत्रों से नहीं चलती 
एक छोटा सा वायरस 
जो छुपा है एक आदमी में 
अनेक आदमियों में फैल सकता है 
एक वायरस... 
सारे गणित को फेल कर रहा है 
जो ग्रस लेता है 
पूरे परिवार को देखते-देखते 
वायरस ने आपको छुआ है या आपने उसे 
पता भी नहीं चलने देता 
आप मुस्कुराते-मुस्कुराते मिल लेते हैं चंद लोगों से 
या रख देते हैं अपना रुमाल मेज पर 
जो बन चुका है जैविक हथियार 
अनजाने में जो भी उठाएगा 
वह भी धोखे में आ जायेगा 
एक दिन आपका माथा तपता है 
आप अस्पताल चले जाते हैं 
वहां भी यदि नही रहे सचेत तो
सरक जाते हैं कुछ वायरस स्वास्थ्य कर्मी या नर्स पर 
... या कभी डॉक्टर पर 
अनजाने में आप बन चुके हैं वाहक 
भगवान न करे कभी ऐसा घटे  
इसीलिए घर पर ही रहें  ! 

गुरुवार, मार्च 3

सुख-दुःख

सुख-दुःख

एक को लिया तो दूसरा पीछे आने ही वाला है
चाहा सुख को तो दुःख को गले लगाना ही है

पार हुआ जो मन दोनों से
उसने ही यह राज जान लिया,
सुख की मिन्नत जिसने छोड़ी
दुःख के भी वह पार हो गया !

प्रकृति का ही यह नियम है
जिसे जानकर मुक्त हुआ मन,
जिस पल गिरी चाह अंतर से
मुस्काया वासन्ती जीवन !

सीधा सरल गणित जीवन का
खोजा जिसने दिया गंवाय,
सहज हुआ जो हटा दौड़ से
पल-पल सुख बरसता जाय !

 ना होना ‘कुछ’ बस होना भर
जिसने जाना यह संतोष,
बहे पवन सा जले अगन सा
पाए नभ, नीर सा तोष !