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सोमवार, दिसंबर 14

ये नन्हे श्रमिक



ये नन्हे श्रमिक

एक आवाज पर मालिक की दौड़े आते
पुरानी मटमैली जैकेट में तन को ढांपते
मुंह में जाने क्या चबाते
 ये बच्चे
अभी से बड़े हो गये हैं
साहब का थैला गाड़ी तक पहुंचाते
फिर से दुकान पर आकर खड़े हो गये हैं
आँखों में चमक अभी शेष है
 फुर्सत के क्षणों में हंसते और खेलते भी होंगे
पर जाने कब वे पल आते हैं
अभी तो ढोते रहना है बोझा
और ढाबे पर जाकर बुझानी है क्षुधा
चाय और टोस्ट से अपने आप ही
माँ के हाथों से खाना.. इनके नसीब में नहीं


शुक्रवार, मई 1

मजदूर दिवस

मजदूर दिवस

घर के बाहर माली दिखा
बगीचे की घास संवारता सुबह-सवेरे ही
याद आया आज मजदूर दिवस है और इसे पता तक नहीं..
कुछ ही देर में आयी कामवाली बाई
पहला सवाल था आज छुट्टी है किस बात की
समझाया उसे आज है मजदूर दिवस
पर उसे तो काम करना था रोज की तरह
कामगार ससुर अस्पताल में भर्ती है
उसे जाने की जल्दी है  
दूध वाला आया
और फिर धोबी घर-घर घूमते
भीगे पसीने से, साइकिल चलाते
उन्हें भी कहाँ ख्याल होगा आज कौन सा दिन है
सोचा.. क्यों न खुद ही कुछ ऐसा करें
आज कुछ खास है उन्हें लगे
माली के लिए मसाला चाय बनाई
बाई के लिए परांठे भी
दूध वाले को बिन मांगे बख्शीश दी
और धोबी से कुछ देर गपशप की
अस्पताल जाकर रोगी को देखा
और.. इस तरह मजदूर दिवस मना !