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मंगलवार, नवंबर 3

हम और वह


हम और वह

हम नहीं होते जब वह होता है
बंद हो जाती है आँख जब वह
 अपने आप में समोता है
हमारा होना ही उसका न होना है
उसका होना ही हमारा खोना है
उतार सारे मुखौटे
जब जाते हैं हम उसके करीब
हम में कुछ बचता ही नहीं
बस रह जाता है वह रकीब
हर चाहत एक चेहरा है
हर लक्ष्य सबब बनता
उससे दूर ले जाने का
हर ख्वाहिश उसे खोने का
वह जो हर कहीं है.. हमारे होने से ही तो है ढका !