उस दिन
यह सारी कायनात
उस दिन चलेगी
हमारे इशारे पर भी
जब हमारी रजा
उस मालिक की रजा से एक हो जाएगी
जब हमारी दुआओं में
हरेक की सलामती की ख्वाहिश भी
सिमट आएगी
जब चाहतें पाक होंगी और दिल मासूम
तब जो घटेगा वह हमें भी
नहीं होगा मालूम
पर रहमतों की बूंदें बिन बात ही बरस जायेंगी
हमारी झोली अचानक ही भर जाएगी
जब श्रद्धा का बिरवा मन में रोप दिया जाएगा
तब उस अनाम का वरदान
दिन-रात मिलने लगेगा
जब इस सच की आंच भीतर झलक जाएगी
तब दुनिया जैसी है वैसी ही नजर आएगी
अपना सुख-दुख जब औरों का सुख-दुख बन जाएगा
तब वह मालिक हमारे द्वारा मुस्कुराएगा !
