अपनों का प्यार
यहाँ कुछ और नहीं
जीवन ही साध्य है
हर सुख टिका है जिस पर
भौतिक, मानसिक, आत्मिक
स्वास्थ्य ही प्राप्य है
श्वासें जो भीतर जा रहीं
अनमोल हैं
बिना उनके देह पड़ी हो सम्मुख
न उसका कोई मोल है
हों निरोगी
हैं जो अस्वस्थ
धन पाएँ निर्धन
जगे सौभाग्य अभागों का
न्याय
मिले पीड़ितों को
वंचितों को
उनका अधिकार
अकेले हैं जो उन्हें
अपनों का प्यार !
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