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शनिवार, सितंबर 5

शिक्षक दिवस पर शुभकामनायें

शिक्षा की जो ज्योति जलाते

आज करें अभिनन्दन उनका 

शिक्षा की जो ज्योति जलाते, 

बन्द पड़े हैं स्कूल किन्तु वे 

ऑन लाइन ही क्लास लगाते !

 

स्वयं सीखकर मनोयोग से 

बांट रहे हैं ज्ञान शिष्य को, 

हर घर ही इक स्कूल बना है 

नमन करें हम उनके श्रम को !

 

पुस्तक में तो सभी लिखा है 

विद्यार्थी अबोध अभी हैं, 

सरल शब्द में पाठ पढ़ा वे  

नव विचार प्रस्तुत करते हैं !

 

नयी नीति भी अपनाएंगे 

सदा सीखने को हैं तत्पर, 

उत्साही स्नेहिल अंतर है 

भारत बढ़े उन्नति पथ पर !

 

मार्ग दिखाते बने आदर्श 

शिक्षक की पहचान यही है, 

शिष्य छिपा है उसके भीतर 

हर समाज का मान वही है !

 

 

 

सोमवार, अगस्त 17

लॉक और अनलॉक

 लॉक और अनलॉक  

कभी लॉक और कभी अनलॉक में रहते 

बड़े हो रहे हैं जो शिशु 

क्या बदल नहीं जायेंगे 

उनके लिए जीवन मूल्यों के आधार ?

लोगों से न मिलना-जुलना 

दो गज की दूरी बनाकर रखना 

यही होगा सामान्य शिष्टाचार !

दादी-नानी के यहाँ छुट्टियों में  

साथ पूरे कुनबे के बच्चों के 

धमाल करना 

बस कहानियों में ही रह जायेगा

स्कूल, बड़े भाई-बहनों से सुने किस्सों में जीवित 

उनकी दुनिया हो जाएगी क्या 

एक चारदीवारी में सीमित !

 बैठ कमरे में वह नेटफ्लिक्स और हॉटस्टार से 

पढेंगे अतीत का इतिहास 

जब भीड़ में लोग चला करते थे आसपास 

लाखों डुबकी लगाते थे कुम्भ में 

हजारों स्टेडियम में हौसला बढ़ाते थे 

जीवन में उलटफेर हुआ है कितना

इसका असर नई पीढ़ी पर ही पड़ेगा 

कैसी दुनिया हम उन्हें सौंप रहे हैं 

इतिहास इसका इल्जाम क्या हम पर ही नहीं मढ़ेगा !


गुरुवार, नवंबर 3

कविता झुलस रही है

 कविता झुलस रही है 

कविता झुलस रही है उस आग में
लगा रहा है जो कोई सिरफिरा
अनगिनत स्वप्न और निशान नन्हे कदमों के
 दफन हो गये जिसकी राख में
उन कक्षाओं की चहकती आवाजें
खो गयीं जैसे बियाबान में
स्कूल की घंटी से बढ़
क्या हो सकता है कोई गीत किसी बच्चे के लिए
जिसमें गाता है उसका भविष्य
सारी समझ आदमी ने
गिरवी रख दी है जैसे
जो जमीन के एक टुकड़े की खातिर
मार रहा है इंसानियत की जागीर
कितना कठिन है वक्त का दौर
जब मर रहे हैं लोग
और दिखाई जाती है उनकी तस्वीर !


सोमवार, फ़रवरी 18

विदाई समारोह


यह कविता मैंने इवा जी के लिए लिखी है, जिनका विदाई समारोह इसी हफ्ते हमारे क्लब में होने जा रहा है, वह एक शिक्षिका हैं और मेरा पुत्र  भी उन्हीं के स्कूल से नर्सरी में पढ़ा था. इस कविता के माध्यम से मैं उन सभी शिक्षिकाओं का भी आभार व्यक्त करती हूँ जो अपने स्नेह और श्रम से नन्हें-मुन्नों के जीवन में आगे बढने की प्रेरणा बनती हैं.


आदरणीय व प्रिय श्रीमती इवा हजारिका के लिए शुभकामनाओं सहित


लघु केश, गर्वीला मुखड़ा, जोश हृदय में, रंग गेहुआँ
बच्चों की दुलारी टीचर, बायदो मिलें सदा मुस्काकर

जोरहाट में बीता बचपन, दो भाई व एक बहन थे
अर्थशास्त्र में ली थी डिग्री, किया काम आर.आर.एल में

सन बयासी में बनीं वह दुल्हन, दुलियाजान आयीं संग दादा
अगले बरस ही पांखी आयी, पाही का अभी दूर था आना

गयी स्कूल जिस वर्ष रितिषा, पीछे-पीछे माँ भी आयी
तब से ले आज तक दिल से, वर्ष सत्ताईस ड्यूटी निभाई

जोश भरा त्वरित कदमों में, खिला-खिला सा अंतर उनका
पहली प्राथमिकता स्कूल थी, जैसे दूजा घर था उनका

असम साहित्य सभा दुलियाजान ने, हाल ही में किया सम्मानित
स्वर्ण जयंती समारोह में, बच्चों को किया सम्बोधित

अभिनय का है शौक बहुत, पहले ट्रूप संग थीं जाती  
कलाकार का दिल पाया है, लघु कहानी भी लिखतीं

अश्रु झलक आते पलकों में, बात बिछड़ने की जब आए
लगभग तीन दशक का साथ, कैसे लेडीज क्लब भुलाए

मन में यादों का हुजूम ले, तीन वर्ष दिल्ली में रहेंगी
टाईनी टॉट्स की प्रिंसिपल बायदो, गौहाटी में फिर बसेंगी

बिटिया बड़ी यूएस में रहती, गुजराती दामाद है सुंदर
मास्टर्स की डिग्री ली हैं, पेशे से दोनों इंजीनियर

पाही नोएडा में पढ़ती है, कानून की करे पढ़ाई
उसकी रूचि अदालत में है, सिम्बियोसिस में सीट है पाई

 सदा रहें स्वस्थ व हर्षित, यही दुआ दिल से देते
हो जीवन सुखद, मुदित सबका, यही कामना हम करते